Bilaspur:बाल गृहों की सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, 156 गार्ड के खर्च पर केंद्र से मांगा जवाब

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में बाल संप्रेक्षण और बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के भागने की घटनाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है। राज्य सरकार ने 26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की मांग की है।
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8 किशोरों के भागने से उठा मामला
मामला महासमुंद के सरकारी ऑब्जर्वेशन होम से आठ किशोरों के भागने और बिलासपुर की एक संस्था से चार किशोरों के फरार होने की घटनाओं से जुड़ा है। इन घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है।
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26 संस्थाओं में 156 गार्ड की मांग
राज्य सरकार की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए 26 बाल देखभाल संस्थाओं में कुल 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहयोग मांगा गया है, ताकि संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सके।
सालाना 4.68 करोड़ रुपये का खर्च
राज्य सरकार ने 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए वित्तीय सहायता की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार 156 सुरक्षा गार्डों पर सालाना करीब 4.68 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
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हाईकोर्ट ने केंद्र को बनाया पक्षकार
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने रजिस्ट्री को इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
गृह मंत्रालय से मांगा शपथपत्र
हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि 156 सुरक्षा गार्डों की तैनाती के लिए राज्य सरकार को केंद्र की किन योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
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25 अगस्त को अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार के जवाब पर यह स्पष्ट होगा कि बाल देखभाल संस्थाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता का रास्ता किस योजना या प्रावधान के तहत निकाला जा सकता है।












