कोल लेवी घोटाले में 104.20 करोड़ का हिसाब, कांग्रेस भवन तक कैश पहुंचने का EOW का दावा, डायरियों में ‘C PARTY’ और ‘BHAWAN’ कोड

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के छठे पूरक चालान में कथित नकदी लेन-देन को लेकर बड़ा दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, जब्त डायरियों में अक्टूबर 2020 से जून 2022 के बीच ‘C PARTY’, ‘भवन’ और ‘BHAWAN’ जैसे शब्दों के साथ 104 करोड़ 20 लाख रुपए का हिसाब दर्ज मिला है। चार्जशीट में इन प्रविष्टियों को कांग्रेस के रायपुर स्थित राजीव भवन तक कथित रकम पहुंचने से जोड़कर देखा गया है। एजेंसी के अनुसार, कोयला परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर 25 रुपए प्रति टन की दर से अवैध वसूली की जाती थी। रकम पहुंचाने, रखने और आगे बांटने के संबंध में डायरियों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का उल्लेख किया गया है। EOW ने करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक चालान विशेष अदालत में पेश किया है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है।
एक ही दिन में 10 करोड़ का हिसाब दर्ज होने का दावा
चार्जशीट में दर्ज विवरण के मुताबिक, 27 जनवरी 2022 को BS-09 में 2 करोड़, 6 करोड़ और 2 करोड़ रुपए की प्रविष्टियां मिलीं। इनका कुल योग 10 करोड़ रुपए होता है। इसी तरह, 2 मार्च 2022 को BS-41 में 4 करोड़ और 2 करोड़ रुपए, 30 मार्च को BS-01 में 5 करोड़ तथा 6 मई को BS-02 में 8 करोड़ रुपए दर्ज होने की बात कही गई है। 7 जून 2022 को BS-02 में 8.70 करोड़ रुपए का हिसाब मिलने का भी उल्लेख है। जांच एजेंसी ने इन प्रविष्टियों को कथित लेन-देन की कड़ियां बताते हुए पूरक चालान में दस्तावेज शामिल किए हैं।
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राजीव भवन में काले बैग पहुंचने के बयान
EOW की चार्जशीट के मुताबिक, रकम पहुंचाने से जुड़े कुछ व्यक्तियों ने कैश से भरे बैग रायपुर स्थित राजीव भवन ले जाने और देवेंद्र डडसेना के पास जमा कराने की बात कही है। चार्जशीट में डडसेना को राम गोपाल अग्रवाल का निजी सहायक बताया गया है। रूपेंद्र यादव और सोहन साहू के बयानों का हवाला देते हुए एजेंसी ने दावा किया है कि उन्होंने भवन के बाईं ओर स्थित शटर के पास गाड़ियों से काले बैग उतरते और उन्हें देवेंद्र डडसेना के कमरे तक ले जाते देखा था। रूपेंद्र यादव ने एक बार में लगभग 8 से 10 बैग आने और उन्हें कमरे तक पहुंचाने में मदद करने की बात कही। एक अन्य बयान में सफेद स्विफ्ट डिजायर और नंबर प्लेट में ‘0009’ अंक होने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन बयानों और कथित नकदी के स्रोत व उपयोग पर अंतिम फैसला अदालत को करना है।
बैग पहुंचने के दौरान कार्यालय का हिस्सा बंद करने का दावा
चार्जशीट में शिशुपाल साहू और गजेंद्र यादव के बयानों का भी उल्लेख है। इनके मुताबिक, कथित तौर पर बैग लाने-ले जाने के दौरान कार्यालय के एक हिस्से को बंद किया गया था और कर्मचारियों को वहां से हटाया गया था। एजेंसी के अनुसार, उस समय राम गोपाल अग्रवाल और देवेंद्र डडसेना के कार्यालय में मौजूद होने का भी बयानों में जिक्र है। जांच एजेंसी का दावा है कि रकम पहुंचाने वाले व्यक्तियों ने ‘भवन’ से रायपुर के राजीव भवन का मतलब बताया और कथित तौर पर सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर रकम वहां पहुंचाने की बात कही। ये सभी बातें चार्जशीट में दर्ज बयानों पर आधारित हैं। संबंधित आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है।
15 जुलाई 2020 के आदेश से कैसे जुड़ा कथित वसूली नेटवर्क?
EOW की जांच के मुताबिक, 15 जुलाई 2020 को जारी आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की मंजूरी अनिवार्य की गई थी। एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल कोयला कारोबारियों और परिवहनकर्ताओं से प्रति टन 25 रुपए की कथित अवैध वसूली के लिए किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, अलग-अलग जिलों से रकम रायपुर पहुंचाई जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर उसका हिसाब रखा जाता और आगे वितरण किया जाता था। इस प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को पूरक चालान का हिस्सा बनाया गया है।
‘CM हाउस’ के नाम से विश्राम गृहों में बुकिंग का दावा
EOW के मुताबिक, अनुराग दीवान के जब्त मोबाइल से 15 जुलाई 2020 के आदेश से संबंधित डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। एजेंसी का दावा है कि सूर्यकांत तिवारी और उनके सहयोगी विभिन्न जिलों में बैठकें करते थे। चार्जशीट में कुछ विश्राम गृहों में ‘CM हाउस’ के नाम से ठहरने की बुकिंग से जुड़े साक्ष्यों का भी उल्लेख है। इसके अलावा बालको और अंबुजा से जुड़े पत्र शामिल किए जाने की बात कही गई है। एजेंसी के अनुसार, एक पत्र में परिवहन बिलों में 25 रुपए प्रति टन जोड़ने का जिक्र है।
जमीन, फ्लैट और वाशरी में निवेश की जांच
EOW की चार्जशीट के मुताबिक, कथित कोल लेवी से प्राप्त रकम को जमीन, फ्लैट, वाशरी और अन्य संपत्तियों में निवेश किए जाने की जांच की गई है।
पियूष कुमार साहू: परिवार से जुड़ी संपत्तियों में कथित रकम निवेश कराने की भूमिका का उल्लेख।
अनुराग चौरसिया: फ्लैट और जमीन खरीद से संबंधित लेन-देन की जांच।
जोगेन्दर सिंह: उनसे जुड़ी सात फर्मों में करीब 40 करोड़ रुपए के कथित लेन-देन का विवरण।
सुनील कुमार अग्रवाल: नकदी रखने, भुगतान करने और वाशरी की खरीद में निवेश से जुड़े तथ्यों का उल्लेख।
दीपेश टांक: जमीन सौदे में रजिस्ट्री मूल्य से अधिक नकदी लेने और उसे कृषि आय के रूप में दिखाने के आरोप।
ये विवरण जांच एजेंसी के आरोपों और चार्जशीट में शामिल सामग्री पर आधारित हैं।
देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी की कथित WhatsApp बातचीत
चार्जशीट में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और कोयला कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के बीच कथित WhatsApp बातचीत का भी उल्लेख है। इसमें रायपुर में मिलने, पहुंचने के स्थान और इंतजार करने से संबंधित संदेश शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, एक संदेश में देवेंद्र यादव के शंकर नगर पहुंचने और मिलने की जगह पूछने का जिक्र है। जवाब में अनुपम नगर पहुंचने की बात कही गई। इसके बाद देवेंद्र यादव के वहां पहुंचने और इंतजार के समय के बारे में पूछने का उल्लेख है। बातचीत में खैरागढ़ जाने का भी जिक्र बताया गया है। जांच एजेंसी ने इन चैट को अपनी जांच सामग्री में शामिल किया है। किसी बातचीत का उल्लेख अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करता; उसकी प्रासंगिकता और साक्ष्यात्मक महत्व का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
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चंद्रदेव राय के कथित 46 लाख और सोने के हार का मामला
ED की जांच के मुताबिक, कांग्रेस के पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय को सूर्यकांत तिवारी से 46 लाख रुपए मिलने का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इसमें से 42 लाख रुपए उत्तर प्रदेश चुनाव में इस्तेमाल किए गए, जबकि करीब 4 लाख रुपए से पत्नी के लिए सोने का हार खरीदा गया। चार्जशीट में कथित WhatsApp बातचीत का उल्लेख है, जिसमें ज्वेलरी शॉप का नाम पूछने, 60 ग्राम के हार की तस्वीर भेजने और उसे खरीदने के संबंध में संदेशों का जिक्र किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, हार की कीमत करीब 4 लाख 30 हजार रुपए बताई गई थी। यह विवरण जांच एजेंसी के दावों पर आधारित है। संबंधित लेन-देन की कानूनी स्थिति अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों से तय होगी।
विनोद तिवारी और आरपी सिंह पर भी रकम लेने के आरोप
ED के मुताबिक, कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने कथित कोल लेवी सिंडिकेट से 19 किश्तों में 1 करोड़ 87 लाख रुपए प्राप्त किए। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ चुनाव और संपत्ति खरीदने में किया गया। सूर्यकांत तिवारी के साथ कथित बातचीत को भी जांच सामग्री में शामिल किए जाने का उल्लेख है। वहीं, कांग्रेस नेता आरपी सिंह पर 2 करोड़ 1 लाख 40 हजार रुपए लेने का आरोप है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, पूछताछ के दौरान उन्होंने रकम लेने की बात स्वीकार की और उसके इस्तेमाल के संबंध में पार्टी के लिए गाड़ियों तथा मीडिया प्रबंधन की बात बताई। इन आरोपों और बयानों को संबंधित दस्तावेजों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा किया जाएगा।
अब तक छह चालान, जांच अभी जारी
EOW के मुताबिक, कोल लेवी मामले में इससे पहले एक मुख्य चालान और पांच पूरक चालान पेश किए जा चुके हैं। अब करीब 9,500 पन्नों के छठे पूरक चालान के जरिए अतिरिक्त दस्तावेज और साक्ष्य विशेष न्यायालय के सामने रखे गए हैं। एजेंसी ने कहा है कि अन्य संभावित संदिग्धों और शेष लेन-देन की जांच भी जारी है। चालान में शामिल सामग्री की जांच और आरोपों की पुष्टि न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत होगी।
क्या है छत्तीसगढ़ का कोल लेवी घोटाला?
छत्तीसगढ़ का कोल लेवी मामला कोयला परिवहन से कथित अवैध वसूली के आरोपों से जुड़ा है। ED का दावा है कि कोयले के परिवहन और ऑनलाइन परमिट प्रक्रिया में बदलाव के जरिए कारोबारियों से प्रति टन 25 रुपए वसूले जाते थे। एजेंसी ने इस कथित नेटवर्क के माध्यम से 570 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली होने का आरोप लगाया है। मामले की जांच के दौरान कई कारोबारियों, अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल की गई। ED की रिपोर्ट के आधार पर ACB/EOW ने भी कार्रवाई की। आरोपियों की गिरफ्तारी, संपत्ति और लेन-देन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच अलग-अलग चरणों में की गई है।




















