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भोपाल में दुकानों की तालाबंदी पर बवाल, पूर्व विधायक डागा ने CM से की हस्तक्षेप की मांग

भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नगर निगम की कार्रवाई से व्यापारी परेशान हैं। पूर्व विधायक जितेंद्र डागा ने CM मोहन यादव से राहत और दुकानों को नियमित करने की मांग की है।
भोपाल में दुकानों की तालाबंदी पर बवाल, पूर्व विधायक डागा ने CM से की हस्तक्षेप की मांग
पूर्व विधायक डागा ने CM से की हस्तक्षेप की मांग

राजधानी भोपाल के आवासीय इलाकों में लंबे समय से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का विरोध बढ़ता जा रहा है। दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर तालाबंदी, नोटिस चस्पा करने और कार्रवाई की प्रक्रिया से व्यापारियों में नाराजगी है। अब इस मामले में हुजूर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार डागा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। डागा ने मुख्यमंत्री से वर्षों से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत देने, मामले की जांच कराने और पात्र दुकानों को नियमानुसार वैध करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर निगम की कार्रवाई से केवल व्यापारी ही नहीं बल्कि इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारी और उनके परिवार भी प्रभावित हो सकते हैं।

30-40 साल से चल रहे कारोबार पर उठे सवाल

पत्रकारों से चर्चा में पूर्व विधायक जितेंद्र डागा ने कहा कि भोपाल में बड़ी संख्या में व्यापारी पिछले कई दशकों से अपना कारोबार चला रहे हैं। इनमें कई प्रतिष्ठान ऐसे हैं, जो करीब 30 से 40 वर्षों से संचालित हो रहे हैं। डागा का कहना है कि इन व्यापारियों को अलग-अलग समय पर नगर निगम से गुमास्ता लाइसेंस मिले और उनसे संपत्ति कर भी वसूला जाता रहा। लंबे समय तक इन दुकानों और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन पर कोई बड़ी आपत्ति नहीं जताई गई। ऐसे में अब अचानक आवासीय क्षेत्र का हवाला देकर प्रतिष्ठानों को बंद करने के नोटिस दिए जाने से व्यापारियों के सामने मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है।

तालाबंदी और नोटिस से व्यापारियों में नाराजगी

पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक महीने से नगर निगम की कार्रवाई के कारण भोपाल के हजारों व्यापारी परेशान हैं। कई स्थानों पर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं जबकि कुछ जगह तालाबंदी जैसी कार्रवाई भी की जा रही है। उनका कहना है कि अचानक कारोबार बंद होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा। इससे जुड़े परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

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पहले की अनुमति और निगम की भूमिका की जांच की मांग

जितेंद्र डागा ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में मांग की है कि कार्रवाई से पहले यह भी जांचा जाना चाहिए कि जिन क्षेत्रों में वर्षों से कारोबार संचालित हो रहा था, वहां पूर्व में नगर निगम की ओर से कौन-कौन सी अनुमतियां दी गई थीं। उन्होंने अधिकारियों की भूमिका की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग भी की है। डागा के मुताबिक जिन अधिकारियों के कार्यकाल में इन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हुईं या उन्हें संचालित होने की अनुमति मिली, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

लंबे समय से चल रही दुकानों को पहले नियमित करने की मांग

पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जो दुकानदार लंबे समय से अपना कारोबार चला रहे हैं, उनके मामलों पर मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि पात्र व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर नियमित या वैध करने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने भविष्य में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत बताई, ताकि आगे ऐसी स्थिति पैदा न हो और व्यापारियों को पहले से नियमों की जानकारी रहे।

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सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी

डागा ने कहा कि व्यापारियों की परेशानी को देखते हुए मामले की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भी रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पिटीशन दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वर्तमान में लंबे समय से संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कम से कम एक बार आवश्यक अनुमति देने और मामले का समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए जाएं।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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