छत का पेंट कुछ दिनों बाद क्यों बदलने लगता है रंग? वजह जानकर नहीं करेंगे ये गलती

घर की छत पर नया पेंट करवाने के बाद शुरुआत में सबकुछ एकदम सही दिखता है। रंग भी अच्छा नजर आता है और छत की फिनिश भी एक जैसी लगती है। लेकिन कुछ समय बाद धूप या कमरे की लाइट पड़ने पर छत के कुछ हिस्से बाकी जगह से अलग दिखाई देने लगते हैं। कहीं पेंट ज्यादा चमकीला दिखता है तो कहीं उसी रंग का हिस्सा हल्का या फीका नजर आता है। खासकर छत के कोनों और किनारों पर यह फर्क ज्यादा दिखाई देता है।
ऐसे में अक्सर लगता है कि पेंट खराब या पुराना हो गया है। लेकिन हर बार इसकी वजह पेंट की क्वालिटी नहीं होती। इसके पीछे सतह की तैयारी, पेंट लगाने का तरीका और रोशनी भी जिम्मेदार हो सकती है। पेंटिंग की भाषा में इसे फ्लैशिंग (Flashing) कहा जाता है।
छत के कोने में पेंट अलग क्यों दिखता है?
फ्लैशिंग तब होती है जब पेंट की गई सतह के अलग-अलग हिस्से रोशनी को अलग तरह से रिफ्लेक्ट करते हैं। इसमें जरूरी नहीं कि अलग-अलग रंग का पेंट लगाया गया हो। एक ही पेंट होने के बावजूद छत का कोई हिस्सा ज्यादा चमकीला और दूसरा हिस्सा मैट नजर आ सकता है। यह समस्या खासकर तब ज्यादा दिखती है जब खिड़की से आने वाली धूप छत पर तिरछी पड़ती है या कमरे की लाइट सीधे छत पर पड़ती है।
पुट्टी या मरम्मत वाला हिस्सा भी हो सकता है कारण
अगर छत के किसी हिस्से में पहले दरार, गड्ढा या प्लास्टर की खराबी थी और उसे पुट्टी से ठीक किया गया है, तो उस जगह की सतह बाकी छत से अलग हो सकती है। पुट्टी वाला हिस्सा पेंट को बाकी सतह की तुलना में अलग मात्रा में सोखता है। ऐसे में एक ही रंग लगाने के बावजूद सूखने के बाद उसकी चमक और फिनिश अलग नजर आ सकती है। इसलिए पेंट करवाने से पहले मरम्मत किए गए हिस्सों को अच्छी तरह तैयार करना जरूरी है।
प्राइमर छोड़ना पड़ सकता है भारी
कई लोग पेंटिंग के दौरान प्राइमर को जरूरी नहीं मानते। लेकिन छत पर अलग-अलग तरह की सतह होने पर प्राइमर काफी अहम होता है। जहां प्लास्टर, पुट्टी और पुरानी पेंट की परत एक साथ हो, वहां पेंट हर जगह एक जैसा नहीं सोखा जाता। प्राइमर न लगाने पर कुछ हिस्सों में पेंट ज्यादा सोख लिया जाता है, जबकि कुछ जगह पेंट सतह के ऊपर ज्यादा रहता है। इससे सूखने के बाद छत की चमक में अंतर दिखाई दे सकता है।
पेंट लगाने का तरीका भी बदल सकता है लुक
कई बार पेंट में कोई खराबी नहीं होती, बल्कि उसे लगाने के तरीके की वजह से छत अलग-अलग दिखाई देती है। अगर रोलर से कहीं मोटी और कहीं पतली परत लग गई या किसी हिस्से पर बार-बार रोलर चलाया गया, तो वहां की फिनिश बदल सकती है। छत के कोनों पर ब्रश और बाकी हिस्से में रोलर इस्तेमाल करने से भी हल्का अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए पूरे हिस्से पर पेंट की परत लगभग एक जैसी रखना जरूरी है।
बाद में किया गया टच-अप भी दिख सकता है
कभी-कभी किसी जगह पेंट कम रह जाता है और सूखने के बाद वहां दोबारा पेंट कर दिया जाता है। भले ही दोनों जगह एक ही रंग का पेंट लगाया गया हो, लेकिन उनकी चमक और फिनिश बिल्कुल एक जैसी होना जरूरी नहीं है। ऐसे में टच-अप किया गया हिस्सा अलग पैच जैसा नजर आ सकता है। तिरछी रोशनी पड़ने पर यह अंतर और साफ दिखाई देता है।
छत का पेंट अलग दिखे तो क्या करें?
अगर छत के किसी कोने में रंग या चमक बाकी हिस्से से अलग नजर आ रही है, तो सिर्फ उसी छोटे हिस्से पर दोबारा पेंट करना हमेशा सही समाधान नहीं होता। सबसे पहले उस हिस्से को हल्के हाथ से सैंड करके सतह को बराबर किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर प्राइमर लगाएं और उसके बाद पेंट करें। अगर अंतर ज्यादा है तो सिर्फ छोटे पैच की बजाय पूरे सेक्शन या पूरी छत पर एक समान कोट करना बेहतर रहता है। इससे अलग-अलग चमक वाले हिस्सों का फर्क काफी कम हो सकता है।
पेंट के बाद दिन की रोशनी में जरूर जांचें
छत का पेंट सही हुआ है या नहीं, यह केवल कमरे की आर्टिफिशियल लाइट में देखकर तय न करें। दिन के समय खिड़की से आने वाली धूप में छत को ध्यान से देखें। अगर किसी कोने में रंग या चमक का अंतर नजर आ रहा है तो शुरुआत में ही उसे ठीक करवाना आसान होता है। इसलिए छत का पेंट कहीं अलग दिखे तो तुरंत इसे खराब या पुराना पेंट न मानें। इसकी वजह सतह की तैयारी, प्राइमर की कमी, पेंट लगाने का तरीका या टच-अप भी हो सकती है। सही तैयारी और एक जैसी पेंटिंग तकनीक से फ्लैशिंग की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




















