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पहले ₹200 में सिम खरीदी, फिर ₹500 में बेची... आखिर साइबर ठगों तक कैसे पहुंची पुलिस ?

I4C के डाटा से खुला फर्जी सिम का नेटवर्क; 151 संदिग्ध सिम 212 साइबर ठगी की शिकायतों से जुड़ीं, एक आरोपी गिरफ्तार और तीन की तलाश
पहले ₹200 में सिम खरीदी, फिर ₹500 में बेची... आखिर साइबर ठगों तक कैसे पहुंची पुलिस ?

इंदौर। साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाली फर्जी सिम का नेटवर्क किस तरह कुछ रुपयों के लालच में तैयार हो रहा था, इसका खुलासा एमआईजी पुलिस ने ऑपरेशन फास्ट-2.0 के तहत किया है। जांच में सामने आया कि एक व्यक्ति ने महज 200 रुपए में सिम खरीदी और उसे 500 रुपए में आगे पहुंचा दिया। कई हाथों से गुजरने के बाद यही सिम साइबर ठगी करने वाले आरोपितों तक पहुंची और इसका इस्तेमाल ठगी में किया गया। पुलिस ने मामले में राजेश चौधरी को गिरफ्तार किया है, जबकि भगवानदास उर्फ नाना, हिमांशु उर्फ रोहित जुनवाल और आशीष शर्मा की तलाश की जा रही है।

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I4C के डाटा से खुला फर्जी सिम का खेल

एडिशनल डीसीपी जोन-2 अमरेंद्र सिंह के मुताबिक, जांच I4C (इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर), गृह मंत्रालय से मिले डाटा के आधार पर शुरू हुई। इंदौर नगरीय क्षेत्र में 49 संदिग्ध पीओएस धारकों और सिम विक्रय एजेंटों से जुड़ी 151 संदिग्ध सिम की जानकारी पुलिस को मिली थी। इन सिम का इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में दर्ज 212 वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों में सामने आया था। पुलिस ने जब सिम के पीछे के नेटवर्क की पड़ताल शुरू की तो एक के बाद एक कड़ियां जुड़ती चली गईं।

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सिम विक्रेता से राजेश, फिर 200 से 500 रुपए का खेल

जांच सिम विक्रेता रोहित दलवे से पूछताछ के साथ आगे बढ़ी। उसने पुलिस को बताया कि 15 मार्च 2026 को दस्तावेजों का मिलान करने के बाद सिम राजेश चौधरी के नाम पर जारी की गई थी। पुलिस ने राजेश से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसने आधार कार्ड के जरिए अपने नाम पर सिम ली थी। बाद में उसे भगवानदास उर्फ नाना को 200 रुपए में बेच दिया। भगवानदास ने यही सिम करीब 500 रुपए में हिमांशु जुनवाल को दी। इसके बाद सिम आशीष शर्मा तक पहुंची। जांच में पुलिस को पता चला कि इसी सिम का इस्तेमाल आशीष द्वारा साइबर ठगी के लिए किया गया था।

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जींस-पैंट की फ्रेंचाइजी का झांसा देकर ठगी

पुलिस के मुताबिक, आरोपित लोगों को फोन कर थोक में कम कीमत पर जींस-पैंट उपलब्ध कराने और फ्रेंचाइजी देने का लालच देते थे। भरोसा जीतने के बाद एडवांस के नाम पर रकम ली जाती और पैसे मिलने के बाद न तो सामान दिया जाता और न ही फ्रेंचाइजी। उत्तर प्रदेश के खीरी जिले के अनिल कुमार गुप्ता को भी इसी तरह निशाना बनाया गया। उसे 30 हजार रुपए में जींस-पैंट की थोक फ्रेंचाइजी देने का झांसा देकर 10 हजार रुपए ले लिए गए। अनिल ने 27 मई को एनसीआरपी पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।

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एक गिरफ्तार, तीन की तलाश

पुलिस ने सिम नेटवर्क की कड़ी जोड़ते हुए राजेश चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं भगवानदास उर्फ नाना, हिमांशु उर्फ रोहित जुनवाल और आशीष शर्मा की तलाश जारी है। जांच में सामने आए 49 संदिग्ध पीओएस और 151 सिम का कनेक्शन देशभर की 212 वित्तीय धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़ना पुलिस के लिए भी अहम सुराग है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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