हरदा में अवैध शराब के खिलाफ महिलाओं का मोर्चा, कलेक्टर से शिकायत; बोलीं- बिगड़ रहा गांव का माहौल

हरदा। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम कनारदा में कथित अवैध कच्ची और पक्की शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत की है। ग्रामीणों ने कलेक्टर और जिला आबकारी अधिकारी को आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में तीन लोगों पर कथित तौर पर अवैध शराब बेचने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि गांव में सुबह करीब 4 बजे से रात 11-12 बजे तक कच्ची शराब उपलब्ध कराई जा रही है।
सस्ती शराब से बच्चों के प्रभावित होने का दावा
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सस्ती कच्ची शराब आसानी से उपलब्ध होने के कारण कम उम्र के बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि शराब के नशे में गाली-गलौज, अश्लीलता और चोरी जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार समझाइश देने के बावजूद कथित शराब बिक्री पर रोक नहीं लगी।
महिलाओं ने कहा- बिगड़ रहा गांव का माहौल
कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी परेशानी रखी। उनका कहना है कि कथित अवैध शराब की बिक्री से गांव का माहौल खराब हो रहा है। महिलाओं के मुताबिक, मजदूरी करके परिवार चलाने वाले कई परिवार शराब की वजह से आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं और बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगाई गई तो स्थिति और खराब हो सकती है।
पहले भी दे चुके हैं आवेदन
गांव के निवासी राकेश पटेल ने बताया कि सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए ग्रामीण कई बार आवेदन दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि कथित अवैध शराब बिक्री से होने वाले नुकसान के बारे में भी प्रशासन को अवगत कराया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि कार्रवाई नहीं होने से कथित तौर पर अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के हौसले बढ़ रहे हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित अवैध शराब बिक्री पर रोक लगाने और जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
ASP ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले में ASP अमित कुमार मिश्रा ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस प्रशासन की ओर से कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाएं अपने गांव लौट गईं। अब ग्रामीणों को प्रशासन की जांच और कार्रवाई का इंतजार है।




















