गुटखा खाने से मना करने पर पत्नी ने पति पर कराई FIR, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की; मां और दो बहनों को राहत

जबलपुर। जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने कहा कि पति के खिलाफ क्रूरता और दहेज की मांग के गंभीर आरोप हैं और क्रूरता से परेशान होकर एफआईआर दर्ज कराती है, तो उसे गलत नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पति की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसकी मां और दो बहनों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया।
चारों के खिलाफ नोहटा थाने में दर्ज हुई थी FIR
हाईकोर्ट में यह मामला जबलपुर के कटंगी में रहने वाले मो. कलीम, उसकी मां अमीना बी, बहन गुड़िया उर्फ समीना और कौसर बी की ओर से दायर किया गया था। इन चारों के खिलाफ मो. कलीम की पत्नी अफसाना बी ने नोहटा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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6 दिसंबर 2020 को हुआ था निकाह
मो. कलीम और अफसाना बी का निकाह 6 दिसंबर 2020 को हुआ था और दोनों के बीच एक संतान भी है। विवाद का मुख्य कारण गुटखा का सेवन बताया गया, जिसे लेकर दोनों के बीच मनमुटाव हुआ और पत्नी ने अपने मायके जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
पति ने झूठे मामले का दिया था दावा
पति मो. कलीम की ओर से दावा किया गया था कि पत्नी को गुटखा खाने से मना करने के कारण ही उसने झूठा मामला दर्ज कराया है। हालांकि अदालत ने पति के इन दावों को नाकाफी पाया और उसके खिलाफ दर्ज मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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मां और दो बहनों के खिलाफ FIR निरस्त
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए उसकी मां अमीना बी और दो बहनों गुड़िया उर्फ समीना, कौसर बी के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया। अदालत ने पति के खिलाफ क्रूरता और दहेज की मांग के गंभीर आरोपों को देखते हुए उसके मामले को खारिज करने से इनकार किया।




















