Raipur:बंगाल की खाड़ी में तूफानी सिस्टम हुआ मजबूत,छत्तीसगढ़ समेत 3 राज्यों में रेड अलर्ट

रायपुर: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव का क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। इसके प्रभाव से पूर्वी, मध्य और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिल सकता है। उपलब्ध मौसम बुलेटिन के अनुसार छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रेड अलर्ट, जबकि झारखंड में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कई अन्य राज्यों को भी येलो अलर्ट के दायरे में रखा गया है।
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बंगाल की खाड़ी का सिस्टम हुआ मजबूत
बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र मजबूत होकर पश्चिम बंगाल के तटीय इलाकों और उससे लगे बांग्लादेश की ओर बढ़ा है। मौसम प्रणाली के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी क्षेत्रों से होते हुए झारखंड की ओर जाने की संभावना जताई गई है। सिस्टम के और मजबूत होने पर बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
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छत्तीसगढ़, ओडिशा और बंगाल में बढ़ा खतरा
मौसम प्रणाली के प्रभाव से पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका है। वहीं छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है।
झारखंड में ऑरेंज अलर्ट
भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए झारखंड में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश से निचले क्षेत्रों, सड़कों, कृषि क्षेत्रों और सामान्य जनजीवन पर असर पड़ सकता है। प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
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15 से ज्यादा राज्य अलर्ट पर
मौसम का असर केवल पूर्वी भारत तक सीमित नहीं रहेगा। अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, असम-मेघालय, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, केरल, कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, राजस्थान के कुछ हिस्सों, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, उत्तराखंड, विदर्भ और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
40 से 50 KM प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं
बारिश के साथ कई क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं का खतरा भी बना हुआ है। कुछ इलाकों में हवा की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में खुले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और किसानों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
मानसूनी गर्त भी सक्रिय
मानसून की निम्न दबाव रेखा सक्रिय बनी हुई है। इसका प्रभाव मध्य और पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ाने में मदद कर रहा है। इसके साथ ही ऊपरी वायुमंडल में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
बिजली गिरने का भी खतरा
भारी बारिश के दौरान कई क्षेत्रों में आकाशीय बिजली और गरज के साथ तेज बारिश की आशंका है। लोगों को आंधी-तूफान के दौरान खुले मैदान, खेत, पेड़, बिजली के खंभे और अन्य जोखिम वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
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किसानों के लिए खास एडवाइजरी
मौसम खराब होने की स्थिति में किसानों को पकी हुई फसलों की कटाई कर सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। कृषि उपज को ऊंचे और सूखे स्थान पर रखें तथा खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। केले और पपीते जैसे कमजोर पौधों को तेज हवाओं से बचाने के लिए सहारा देने की सलाह दी गई है।
पशुधन को भी सुरक्षित रखें
भारी बारिश और आंधी के दौरान पशुओं को सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर रखने की जरूरत है। पशुओं के लिए पर्याप्त सूखा चारा और साफ पीने के पानी की व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है।
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मौसम बिगड़े तो इन बातों का रखें ध्यान
प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें। बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों से बचें। बिजली चमकने पर खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों। किसानों को खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी गई है।












