गांधी जयंती से पहले JAH में बदहाल मिली महात्मा गांधी की प्रतिमा, धूल और मकड़जाल के बीच ताले में बंद

ग्वालियर। 2 अक्टूबर को देशभर में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाएगी। सरकारी और सामाजिक मंचों से गांधी के विचारों, स्वच्छता और सादगी का संदेश दिया जाएगा। लेकिन ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल (JAH) के पुराने परिसर में स्थित मेडिकल स्टाफ हॉल की तस्वीरें व्यवस्थाओं के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। यहां महात्मा गांधी की प्रतिमा लंबे समय से ताले के पीछे बंद है। प्रतिमा पर धूल जमी है और मकड़जाल दिखाई दे रहे हैं।
ऐतिहासिक इमारत भी बदहाल
पुराने परिसर की पत्थर वाली इस इमारत का इतिहास भी काफी पुराना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 1899 में सिंधिया राजवंश द्वारा इसका निर्माण कराया गया था। तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने इसका उद्घाटन किया था। बाद में जीआरएमसी की शुरुआत के साथ इस परिसर में अस्पताल की गतिविधियां संचालित होती रहीं। यहां ग्वालियर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। कंपू रोड स्थित हजार बिस्तर अस्पताल के शुरू होने के बाद कई विभाग वहां स्थानांतरित हो गए। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने पुराने भवन में संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव भी तैयार किया था, लेकिन वर्तमान में यह इमारत देखरेख के अभाव में जर्जर होती दिखाई दे रही है।
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स्वच्छता के संदेश के बीच सवाल
महात्मा गांधी ने स्वच्छता को अपने विचारों और कार्यों में विशेष महत्व दिया था। ऐसे में उनकी प्रतिमा का धूल और मकड़जाल के बीच बंद कमरे में होना व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। गांधी जयंती के अवसर पर जहां प्रतिमाओं पर माल्यार्पण और कार्यक्रम होंगे, वहीं JAH परिसर में प्रतिमा की मौजूदा स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रबंधन ने संज्ञान लेने की बात कही
मामले को लेकर JAH प्रवक्ता डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने कहा कि यह मामला संज्ञान में लाया गया है और इसे जल्द दिखवाया जाएगा। उन्होंने संबंधित जिम्मेदारों को राष्ट्रपिता की प्रतिमा के रखरखाव के निर्देश देने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने भवन में संचालित विभाग हजार बिस्तर अस्पताल में स्थानांतरित हो चुके हैं।




















