CGPSC मेंस रिजल्ट पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दोबारा जांच की मांग खारिज,608 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू रहेगा स्थगित

प्रेम कुमार,रायपुर: CGPSC राज्य सेवा परीक्षा-2025 के मेंस रिजल्ट और उत्तर पुस्तिकाओं के दोबारा मूल्यांकन की मांग को लेकर दायर दो याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मौजूदा परीक्षा नियमों में उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है। साथ ही याचिकाकर्ता मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी स्पष्ट गड़बड़ी को साबित नहीं कर सके।
608 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू पर क्या हुआ?
CGPSC ने 265 पदों के लिए आयोजित राज्य सेवा परीक्षा के मेंस परिणाम के बाद 608 अभ्यर्थियों को अगले चरण यानी इंटरव्यू के लिए पात्र पाया था। हालांकि, इंटरव्यू प्रक्रिया फिलहाल स्थगित है। आयोग की ओर से नई तारीख बाद में जारी की जाएगी।
1:3 अनुपात को लेकर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि 265 पदों के लिए नियम के अनुसार 1:3 के अनुपात में करीब 795 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था। उनका कहना था कि केवल 608 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, इसलिए उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जानी चाहिए।
PSC ने बताई 608 चयन की वजह
PSC ने हाईकोर्ट में बताया कि नियमों के अनुसार सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए प्रत्येक निर्धारित पेपर में न्यूनतम 33 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 23 प्रतिशत अंक जरूरी थे। आयोग के अनुसार केवल 608 अभ्यर्थी ही अपने वर्ग के निर्धारित न्यूनतम अंक पूरे कर सके। इसी कारण 1:3 के अनुपात में अधिक अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया जा सका।
हाईकोर्ट ने कहा- नियमों के मुताबिक हुआ चयन
जस्टिस बीडी गुरु की कोर्ट ने PSC के शपथपत्र का हवाला देते हुए कहा कि इंटरव्यू के लिए उन्हीं अभ्यर्थियों को बुलाया गया, जिन्होंने विज्ञापन और परीक्षा नियमों के अनुसार न्यूनतम अंक हासिल किए थे। याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि न्यूनतम योग्यता पूरी करने वाले किसी अभ्यर्थी को जानबूझकर इंटरव्यू से बाहर किया गया।
दोबारा मूल्यांकन के लिए ठोस आधार जरूरी
कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कम अंक मिलने या मूल्यांकन को लेकर संदेह होने के आधार पर उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया जा सकता। मौजूदा नियमों में ऐसी दोबारा जांच का कोई प्रावधान भी नहीं है। जब तक मूल्यांकन में स्पष्ट और ठोस त्रुटि सामने नहीं आती, अदालत परीक्षा प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के राम विजय सिंह मामले में दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शैक्षणिक और परीक्षा संबंधी मामलों में अदालतों को विशेषज्ञों द्वारा किए गए मूल्यांकन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचना चाहिए। अदालत स्वयं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर यह तय नहीं कर सकती कि कौन-सा उत्तर सही है।
कांग्रेस ने भी उठाए थे सवाल
CGPSC मेंस रिजल्ट को लेकर कांग्रेस ने भी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। पार्टी की ओर से रिजल्ट की स्थिति स्पष्ट करने और इंटरव्यू प्रक्रिया को रोकने की मांग की गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी 265 पदों के मुकाबले 1:3 अनुपात में 795 अभ्यर्थियों के चयन का मुद्दा उठाया था।
आयोग ने पहले ही साफ किया था कारण
आयोग की ओर से पहले स्पष्ट किया जा चुका है कि 608 अभ्यर्थियों के चयन के पीछे किसी तकनीकी या मानवीय गलती की वजह नहीं है। आयोग के मुताबिक कई अभ्यर्थी निर्धारित न्यूनतम अंक पूरे नहीं कर सके, जिसके कारण 1:3 के अनुपात में अभ्यर्थियों का चयन संभव नहीं हो पाया।
16 सितंबर को स्थगित हुई थी आगे की प्रक्रिया
CGPSC ने 16 सितंबर को राज्य सेवा परीक्षा-2025 के अगले चरण की प्रक्रिया स्थगित करने का आदेश जारी किया था। इसमें दस्तावेज सत्यापन और इंटरव्यू की प्रक्रिया शामिल थी। आयोग ने नई तारीख अभी घोषित नहीं की है।
अब 608 अभ्यर्थियों को नई तारीख का इंतजार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद 608 अभ्यर्थियों की निगाहें अब CGPSC की अगली घोषणा पर रहेंगी। आयोग द्वारा दस्तावेज जांच और इंटरव्यू की नई तारीख जारी किए जाने के बाद भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अभ्यर्थियों को आयोग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी गई है।




















