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इंदौर में दीपावाली बाद जल संकट का खतरा, नए बोरिंग खनन पर रोक के लिए कलेक्टर को भेजा प्रस्ताव

इंदौर में इस वर्ष औसत से काफी कम बारिश के कारण जलस्रोतों और भूजल स्तर पर असर पड़ा है। नगर निगम ने दीपावली के बाद संभावित जल संकट से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है। पानी की बर्बादी रोकने, टैंकर बढ़ाने और व्यावसायिक उपयोग पर नियंत्रण जैसे कदमों पर विचार किया जा रहा है।
इंदौर में दीपावाली बाद जल संकट का खतरा, नए बोरिंग खनन पर रोक के लिए कलेक्टर को भेजा प्रस्ताव
इंदौर का बिलावली तालाब कम वर्षा के कारण भर नहीं पाया, इस वजह से जलसंकट की आशंका है।

इंदौर। शहर में इस वर्ष कम बारिश के कारण आने वाले दिनों में जल संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। बारिश की कमी का असर शहर के जलस्रोतों और भूजल स्तर पर दिखाई देने लगा है। ऐसे में नगर निगम ने दीपावली के बाद संभावित जल संकट से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। नगर निगम आयुक्त का कहना है कि संकट से निपटने के लिए समय रहते सभी जरूरी कदम उठाने होंगे और इसके लिए सभी वर्गों से सुझाव लिए जाएंगे।

महापौर के लौटते ही होगी बैठक

महापौर फिलहाल विदेश दौरे पर हैं। उनके शहर लौटते ही जल संकट को लेकर बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें शहर के जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, एमआईसी सदस्यों, पर्यावरणविदों, अधिकारियों और बुद्धिजीवियों को शामिल किया जाएगा। बैठक में कम बारिश के कारण पैदा हुई स्थिति और आने वाले महीनों में पानी की उपलब्धता को लेकर चर्चा होगी।

आधी भी नहीं हुई औसत बारिश

इस वर्ष शहर में मात्र 23.2 इंच बारिश हुई है, जो औसत आकड़े के आधे से कम है, इसका सीधा असर जलस्रोतों पर पड़ा है। शहर के कई तालाब पर्याप्त नहीं भर पाए हैं और भूजल स्तर भी कम हुआ है। ऐसे में गर्मी शुरू होने से पहले ही जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

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यशवंत सागर भी नहीं हुआ फुल

यशवंत सागर डेम भी इस वर्ष पूरी क्षमता से नहीं भर पाया। सामान्य तौर पर बारिश के दौरान डेम के गेट कई बार खोलने पड़ते हैं, लेकिन इस वर्ष पर्याप्त पानी नहीं आने के कारण ऐसी स्थिति नहीं बनी। इससे आने वाले समय में जलापूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।

अभी 400 टैंकरों से व्यवस्था

नगर निगम फिलहाल करीब 300 पानी के टैंकर किराए पर लेकर चला रहा है, जबकि करीब 100 टैंकर निगम के अपने हैं। पार्षदों और एमआईसी सदस्यों की ओर से लगातार अतिरिक्त टैंकरों की मांग भी सामने आ रही है। आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि जल संकट की समीक्षा के बाद आवश्यकता के अनुसार टैंकरों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया जाएगा। गौरतलब है कि गर्मियों में निगम को करीब 700 टैंकरों के जरिए पानी की व्यवस्था करनी पड़ी थी।

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पानी की बर्बादी पर सख्ती की तैयारी

संभावित जल संकट को देखते हुए पानी की खपत कम करने और अनावश्यक उपयोग पर रोक लगाने की तैयारी भी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इन गतिविधियों पर प्रतिबंध या स्पॉट फाइन लगाया जा सकता है-

  •  वॉशिंग सेंटर में पानी के अत्यधिक उपयोग पर प्रतिबंध।
  • बोरिंग के पानी के व्यावसायिक उपयोग पर रोक या नियंत्रण।
  • आरओ वाटर सेंटर में भूजल के उपयोग की समीक्षा और आवश्यकता अनुसार प्रतिबंध।
  • घरों के बाहर पाइप से वाहन धोने पर रोक।
  • सड़क, गली या खुले स्थान पर पानी बहाने पर स्पॉट फाइन।
  • निर्माण कार्यों में पीने योग्य पानी के अनावश्यक इस्तेमाल पर रोक।
  • जलापूर्ति के दौरान पानी की बर्बादी करने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई।

सभी को मिलकर जलस्रोतों का बेहतर प्रबंधन करना होगा

इस बारे में निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल का कहना है कि कम बारिश के कारण बनने वाली स्थिति से निपटना केवल निगम की जिम्मेदारी नहीं है। शहर के सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिकों को मिलकर पानी बचाने और उपलब्ध जलस्रोतों के बेहतर प्रबंधन पर काम करना होगा। हम बैठक में प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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हमने अपने जीवन में इंदौर में इतनी कम बारिश नहीं देखी

पर्यावरणविद डॉ. ओपी जोशी का कहना है कि इस वर्ष शहर में कम बारिश चिंता का विषय है, नगर निगम और प्रशासन बड़ी संवेदनशीलता के साथ इस संकट से निपटना होगा। हमने अपने जीवन में इंदौर शहर में इतनी कम बारिश नहीं देखी। हालात चिंता जनक है, संकट से निपटने के लिए तैयारी शुरू करनी चाहिए। निर्माण, धुलाई, उद्योग सहित अन्य क्षेत्रों में पानी का उपयोग सीमित करना होगा। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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