कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने दूसरी बार दिया इस्तीफा, वाल्मीकि घोटाले में फंसे

बी. नागेंद्र इसी महीने की शुरुआत में डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल हुए थे। उन्होंने भाजपा पर ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए डराने का आरोप लगाया है। नागेंद्र ने कहा कि मनुवादी उन्हें इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे एक आदिवासी व्यक्ति को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते। यह दूसरी बार है, जब उन्होंने घोटाले से जुड़े विवाद के बीच कर्नाटक सरकार के मंत्री पद से इस्तीफा दिया है।
दूसरी बार मंत्री पद से इस्तीफा
बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसी दौरान वह भावुक नजर आए और रोते हुए अपनी बात रखी। नागेंद्र अगस्त की शुरुआत में डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल में फिर शामिल किए गए थे। अब वाल्मिकी अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले को लेकर बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है और इस पूरे मामले को राजनीतिक तरीके से भी देखा जाना चाहिए।
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'मनुवादियों का मुकाबला करने के लिए उन्हें अपनी कमर कसनी होगी'
नागेंद्र ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा उन्हें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के माध्यम से डरा नहीं सकती। नागेंद्र ने यह भी कहा कि उन्हें मनुवादी ताकतें निशाना बना रही हैं। उनके मुताबिक, इन लोगों को एक आदिवासी समुदाय से आने वाले व्यक्ति का आगे बढ़ना पसंद नहीं है। उन्होंने भाजपा की ओर इशारा करते हुए कहा कि मनुवादियों का मुकाबला करने के लिए उन्हें अपनी कमर कसनी होगी।
सिद्दारमैया सरकार में भी छोड़ा था पद
यह पहली बार नहीं है, जब बी. नागेंद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है। इससे पहले वह पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री थे और जून 2024 में कथित घोटाले से जुड़े विवाद के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। उस समय भी वाल्मिकी अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठे थे। अब दोबारा मंत्री बनने के कुछ ही समय बाद उन्हें इसी मामले को लेकर दबाव का सामना करना पड़ा। इस तरह घोटाले से जुड़ा विवाद एक बार फिर नागेंद्र के राजनीतिक भविष्य और कांग्रेस सरकार के लिए चर्चा का विषय बन गया है।




















