‘इंसाफ चाहिए’ के नारों से गूंजा IIT दिल्ली, ऋषिकेश की मौत पर किया प्रदर्शन, आधी रात छात्रों ने निकाला फ्लैश मार्च

दिल्ली स्थित IIT में 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। छात्र की मौत के बाद संस्थान के दूसरे छात्र भी परिवार के समर्थन में सामने आए हैं। 28 अगस्त की देर रात सैकड़ों छात्रों ने परिसर में फ्लैश मार्च निकाला और ऋषिकेश के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने IIT प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। छात्रों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। साथ ही घटना की जिम्मेदारी तय करने और परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की जा रही है।
पांचवें दिन भी छात्रों का प्रदर्शन जारी
ऋषिकेश की मौत के बाद शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन पांचवें दिन भी जारी रहा। छात्र प्रशासन से यह जानना चाहते हैं कि ऋषिकेश की परेशानियों को लेकर संस्थान की ओर से किस तरह की मदद दी गई थी और क्या व्यवस्थाओं में किसी तरह की कमी रह गई थी। छात्रों का कहना है कि परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
परिवार ने संस्थान की व्यवस्था पर उठाए सवाल
ऋषिकेश के परिवार ने उसकी मौत के बाद IIT दिल्ली की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल उठाए हैं। परिवार के मुताबिक, ऋषिकेश पढ़ाई और हॉस्टल से जुड़ी परेशानियों के कारण काफी तनाव में था और वह घर लौटने की बात भी करता था। परिवार का आरोप है कि इलाज और विशेषज्ञों से मदद लेने के बाद भी संस्थान की कुछ प्रक्रियाओं को लेकर ऋषिकेश परेशान था। परिवार अब चाहता है कि इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए।
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पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था ऋषिकेश
परिवार के अनुसार, ऋषिकेश पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर छात्र था। उसने अपने पहले सेमेस्टर में 8 CGPA हासिल किया था। हालांकि, बाद में स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों के चलते उसे इलाज की जरूरत पड़ी। भाई अभिषेक कुमार के मुताबिक, हॉस्टल में कमरा नहीं मिलने की वजह से भी ऋषिकेश परेशान था। परिवार का कहना है कि उसे लगता था कि परिसर से बाहर रहकर पढ़ाई करना उसके लिए मुश्किल हो रहा है।
पिता की मौत के बाद भी जारी रखा पढ़ाई का सफर
परिवार के मुताबिक, साल 2014 में पिता की मौत के बाद ऋषिकेश को NIT राउरकेला की पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद उसने मगध विश्वविद्यालय से भौतिकी की पढ़ाई पूरी की। लंबे शैक्षणिक सफर के बाद जुलाई 2025 में उसका दाखिला IIT दिल्ली में हुआ। परिवार के लिए यह बड़ी उपलब्धि थी और ऋषिकेश भी यहां पढ़ाई करने को लेकर काफी उत्साहित था।
IIT ने इलाज और काउंसलिंग को लेकर दी जानकारी
IIT दिल्ली की ओर से बताया गया है कि इस साल होली के बाद कुछ छात्रों ने ऋषिकेश की स्थिति को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद उसे संस्थान के अस्पताल ले जाया गया, जहां मनोचिकित्सक ने उसका आकलन किया और जरूरी सहायता दी। इसके बाद परिवार उसे एक विशेषज्ञ अस्पताल भी लेकर गया, जहां करीब एक महीने तक उसका इलाज चला। संस्थान के मुताबिक, बाद में ऋषिकेश की पढ़ाई से जुड़े कुछ अनुरोधों को भी मंजूरी दी गई थी। IIT का कहना है कि जुलाई और अगस्त में भी संस्थान के काउंसलर और डॉक्टर की ओर से उसे सहायता दी गई थी।
बाहरी समिति करेगी पूरे मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए IIT दिल्ली ने पांच सदस्यीय बाहरी समिति बनाई है। यह समिति छात्र की मौत से जुड़ी परिस्थितियों और उससे जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच करेगी। वहीं पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने बताया है कि मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और छात्र का मोबाइल जांच के लिए कब्जे में लिया गया है। अब सभी की नजर बाहरी समिति की जांच पर है। इसकी रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि घटना से पहले छात्र की स्थिति क्या थी, उसे संस्थान की ओर से किस तरह की मदद मिली और परिवार की ओर से उठाए गए सवालों में कितनी सच्चाई है।




















