Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

क्या नियमितीकरण से पहले दैनिक वेतन भोगी सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी? हाईकोर्ट ने लार्जर बेंच को भेजा मामला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पेंशन लाभ से जुड़ा मामला लार्जर बेंच को भेजा है। अब लार्जर बेंच तय करेगी कि नियमित पद पर संविलियन से पहले दी गई दैनिक वेतन भोगी सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी या नहीं।
क्या नियमितीकरण से पहले दैनिक वेतन भोगी सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी? हाईकोर्ट ने लार्जर बेंच को भेजा मामला
क्या नियमितीकरण से पहले दैनिक वेतन भोगी सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी?

जबलपुर। चार फैसलों में विरोधाभासी अभिमतों को देखते हुए जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच ने रजिस्ट्री कार्यालय को मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के सामने प्रस्तुत करने को कहा है। लार्जर बेंच के फैसले के बाद प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पेंशन लाभ को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

विरोधाभासी फैसलों के चलते लार्जर बेंच को भेजा मामला

मप्र हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी के पेंशन लाभ से जुड़ा मामला लार्जर बेंच को भेजा है। लार्जर बेंच को तय करना है कि इन कर्मचारियों के नियमित पद पर हुए संविलियन से पहले दी गई सेवाएं पेंशन लाभ में जुड़ेंगी या नहीं। दरअसल, इस बारे में चार फैसलों में विरोधाभासी अभिमतों को देखते हुए जस्टिस दीपक खोत की सिंगल बेंच ने रजिस्ट्री कार्यालय को मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत करने कहा है।

ये भी पढ़ें: इंदौर हाई कोर्ट ने कहा-हर अनियमितता के लिए सीईओ जिम्मेदार नहीं, 110 ट्रांजिट पासबुक, 26 खदानों के अनुबंध के मामले में पूर्व सीईओ सबीना बरी

हजारों पूर्व पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के पेंशन लाभ पर असर

लार्जर बेंच के फैसले के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रदेश के हजारों पूर्व दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को उनकी शुरुआती संविदा या दैनिक वेतन भोगी सेवा का पेंशन लाभ मिलेगा या नहीं। मामला दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की पेंशन के लिए अर्हक सेवा से जुड़ा हुआ है। इसमें यह भी तय होना है कि नियमितीकरण या संविलियन से पहले दी गई सेवा की अवधि को पेंशन के लाभ में जोड़ा जाएगा या नहीं।

Breaking News

1985 में पूर्व दैनिक वेतन भोगी के रूप में हुई थी नियुक्ति

गौरतलब है कि नरसिंहपुर के लोक निर्माण विभाग से चौकीदार के पद से रिटायर हुए कल्याण सिंह गौंड़ ने यह याचिका दाखिल की है। उसकी नियुक्ति 1 जुलाई 1985 को दैनिक वेतन भोगी के रूप में चौकीदार के पद पर हुई थी। 13 फरवरी 1997 को शासकीय आदेश के तहत उसका नियमित पद पर संविलियन हुआ था।

2018 में रिटायरमेंट के बाद दाखिल की याचिका

31 जनवरी 2018 को रिटायरमेंट के बाद जब उसे दैवेभो के रूप में दी गईं सेवाओं का लाभ पेंशन में नहीं मिला, तब यह याचिका वर्ष 2019 में दाखिल की गई थी। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राजेन्द्र कुमार पाण्डेय और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयश ठाकुर ने दलीलें रखीं। अब लार्जर बेंच के सामने मुख्य रूप से यह तय होगा कि कामचलाऊ या आकस्मिक स्थापना और नियमित स्थापना में संविलियन के लिए दैनिक वेतन भोगी की पेंशन के लिए अर्हक सेवा क्या होगी।

ये भी पढ़ें: कर्नाटक के मंत्री बी. नागेंद्र ने दूसरी बार दिया इस्तीफा, वाल्मीकि घोटाले में फंसे

इन बिन्दुओं का होगा निराकरण?

  • कामचलाऊ या आकस्मिक स्थापना और नियमित स्थापना में संविलियन के लिए दैनिक वेतन भोगी की पेंशन के लिए अर्हक सेवा (क्वालिफाइंग सर्विस) क्या होगी?
  • क्या नियमितीकरण या संविलियन से पहले दैवेभो द्वारा दी गई सेवा की अवधि को पेंशन के लाभ में जोड़ा जाएगा?
Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

Latest Posts