Aakash Waghmare
14 Jan 2026
26 नवंबर 2008 की रात भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई भय और गोलियों की आवाज से दहल उठी। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने समुद्री रास्ते से शहर में प्रवेश किया और 60 घंटे तक चले इस भीषण हमले में 166 लोगों की जान चली गई।
बता दें कि, हमला 26 नवंबर की रात करीब 9:30 बजे शुरू हुआ। जब आतंकियों ने मछुआरों की नाव कुबेर पर कब्जा कर मुंबई के तट पर उतरने का रास्ता बनाया। शहर में घुसते ही वे दो-दो के समूहों में बंट गए और लगातार फायरिंग करते हुए कई प्रमुख स्थानों पर हमला किया। उनके निशाने पर CST रेलवे स्टेशन, ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा अस्पताल, लियोपोल्ड कैफे और नारिमन हाउस जैसे भीड़भाड़ वाले और महत्वपूर्ण स्थान थे। कुछ ही मिनटों में मुंबई गोलियों और धमाकों से थर्रा उठी।
जांच में सामने आया था कि यह पूरी साजिश पाकिस्तान में बैठकर लश्कर-ए-तैयबा ने रची थी। हमले का उद्देश्य भारत में दहशत फैलाना, अधिक से अधिक जनहानि करना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर दिखाना था। इस प्लानिंग में हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, डेविड हेडली और तहव्वुर राणा जैसे नाम सामने आए, जिनमें हेडली और राणा ने हमले से पहले मुंबई में कई जगहों की रेकी कर आतंकियों की मदद की।
हमले के दौरान मुंबई पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभाला, लेकिन आतंकियों के आधुनिक हथियारों और बर्बर फायरिंग के कारण हालात तेजी से बिगड़ गए। इसके बाद NSG कमांडो, मरीन कमांडो (MARCOS) और ATS की टीमें मौके पर पहुंचीं। ओबेरॉय ट्राइडेंट में ऑपरेशन सबसे पहले खत्म हुआ, जबकि ताज होटल में 60 घंटे लंबा और सबसे चुनौतीपूर्ण अभियान चला। 29 नवंबर की सुबह सभी 9 आतंकी मार गिराए गए, जबकि अजमल कसाब ही एकमात्र था जिसे जिंदा पकड़ा गया और 2012 में फांसी दी गई।

26/11 हमलों के बाद भारत की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का गठन हुआ, NSG के नए हब खोले गए और तटीय सुरक्षा को आधुनिक रडार, GPS और तेज बोट्स से मजबूत किया गया। पुलिस को आधुनिक हथियार मिले, इंटेलिजेंस शेयरिंग बेहतर हुई और होटल-मॉल सुरक्षा के सख्त नियम लागू किए गए।