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Hemant Nagle
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Naresh Bhagoria
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Vijay S. Gaur
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भोपाल। देश और प्रदेश में मंगलवार को राम विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। प्रदेश के ओरछा में होने वाला सीताराम विवाह देशभर में प्रसिद्ध है। इसके अलावा प्रदेश के एक और नगर में राम विवाह को उत्सव के रूप में मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस दिन सामूहिक विवाह का आयोजन भी किया जाता है। इस बार यहां भगवान श्रीराम के साथ 25 दूल्हों की बारात निकल रही है।
इटारसी की एक मंदिर समिति पिछले 40 सालों से यह आयोजन करते आ रही है। शहर के पुराने इलाके में एक पुराना मंदिर है। इसे देवल मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां की एक समिति नवरात्र में माता काली की प्रतिमा स्थापित करती है। इसलिए इस समिति का नाम काली समिति है। काली समिति में कोई पदाधिकारी नहीं है। समिति में सभी सदस्य हैं, हालांकि सबक अपनी-अपनी जिम्मेदारियां बंटी हुई है।
काली समिति के सदस्य बताते हैं कि श्रीराम विवाह उत्सव का य 41वां वर्ष है। समिति ने सामूहिक विवाह का आयोजन बहुत पहले शुरू कर दिया था। तब सरकारें सामूहिक विवाहें आयोजित नहीं करती थीं। तब एक साथ 100 से 150 जोड़ों का विवाह भी मंदिर समिति द्वारा नि:शुल्क करया गया। समिति जरूरतमंद परिवारों के लड़के-लड़कियों के विवाह कराने के लिए कोई शुल्क नहीं लेती है, बल्कि आम लोगों से जुटाए गए धन संग्रह से उन्हें उपहार आदि देकर विदा करती है।
मंदिर समिति के जयप्रकाश पटेल, और किशोर कुमार उदयपुरिया कहते हैं कि मंदिर समिति द्वारा कराए जाने वाले सामूहिक विवाह में न केवल मप्र बल्कि उप्र, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ से भी वर-वधू के विवाह संपन्न हुए हैं। अभी भी दूर-दूर से लोग विवाह कराने पहुंचते हैं।
श्री राम विवाह में भगवान और दूल्हों की बारात नगर के मध्य स्थित द्वारिकाधीश मंदिर से प्रारंभ होती है। बारात पुरानी इटारसी स्थित देवल मंदिर पहुंचती है जहां विवाह संपन्न होता है। करीब तीन किलोमीटर लंबी बारात में नगर के जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य और आम नागरिक बाराती बनते हैं। बारात पहुंचने के बाद रात को विवाह संपन्न होते हैं। अगले दिन देवल मंदिर से द्वारिकाधीश मंदिर तक शोभायात्रा निकलती है।