CAA पर बंगाल सरकार का बड़ा फैसला :6 महीने में पूरी होगी प्रक्रिया, जानिए क्या है कानून?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को घोषणा की कि राज्य में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत लंबित सभी आवेदनों का निपटारा अगले छह महीने के भीतर कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि CAA किसी की नागरिकता छीनने का नहीं, बल्कि पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता देने का कानून है।
न्यू टाउन में आयोजित नागरिकता प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तर 24 परगना के मतुआ समुदाय के करीब 300 लोगों को नागरिकता प्रमाण पत्र सौंपे। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने राजनीतिक कारणों से लोगों के बीच CAA को लेकर भ्रम फैलाया था।
अब तक करीब 24 हजार लोगों को मिला प्रमाण पत्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 23,956 नागरिकता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें नई सरकार बनने के बाद पिछले 11 सप्ताह में दिए गए 5,966 प्रमाण पत्र भी शामिल हैं। पूरे राज्य से 2,30,605 आवेदन प्राप्त हुए हैं। सबसे अधिक 10,191 प्रमाण पत्र नादिया जिले में और 8,930 प्रमाण पत्र उत्तर 24 परगना में जारी किए गए हैं।
मतुआ समुदाय के लिए अहम कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से नागरिकता का इंतजार कर रहे लोगों को अब उनका अधिकार मिल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले महीनों में और पात्र लोगों को भी नागरिकता प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। साथ ही लोगों से ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की।
पश्चिम बंगाल में मतुआ समुदाय लंबे समय से नागरिकता की मांग करता रहा है। बांग्लादेश से आए शरणार्थियों की बड़ी आबादी इस समुदाय से जुड़ी है, इसलिए CAA का मुद्दा राज्य की राजनीति में भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
तृणमूल कांग्रेस पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए CAA को लेकर लोगों में गलत जानकारी फैलाई। उन्होंने कहा कि अब सरकार पात्र लोगों तक कानून का लाभ पहुंचाने के लिए तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुराने वादों का भी जिक्र करते हुए कहा कि मतुआ समुदाय से किया गया नागरिकता का वादा अब पूरा किया जा रहा है।
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क्या है CAA?
CAA यानी नागरिकता संशोधन अधिनियम। इस कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
इस कानून का लाभ केवल उन लोगों को मिलेगा जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ चुके थे। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है और कई मामलों में पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज नहीं होने पर भी आवेदन किया जा सकता है। CAA के तहत इन लोगों के लिए भारत में रहने की न्यूनतम अवधि 11 साल से घटाकर 5 साल कर दी गई है।
CAA को लेकर क्या है विवाद?
CAA लागू होने के बाद देश के कई हिस्सों में इसका विरोध हुआ था। विरोध करने वालों का कहना है कि इस कानून में केवल गैर-मुस्लिम समुदायों को शामिल किया गया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कानून केवल पड़ोसी तीन देशों में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यकों को राहत देने के लिए बनाया गया है।
सरकार लगातार यह स्पष्ट करती रही है कि CAA किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता छीनने का कानून नहीं है, बल्कि यह केवल पात्र शरणार्थियों को नागरिकता देने की व्यवस्था करता है। वहीं विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने कानून के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जिसके कारण यह मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।
रोजगार से लेकर सरकारी योजना का मिलें लाभ
CAA के दायरे में आने वाले शरणार्थी समुदाय चाहते हैं कि नागरिकता की प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि उन्हें शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और अन्य संवैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ मिल सके। खासकर मतुआ समुदाय लंबे समय से नागरिकता प्रमाण पत्र मिलने की मांग करता रहा है। अब राज्य सरकार का दावा है कि अगले छह महीने में सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया जाएगा।











