PU Special :भोपाल में लिव-इन रिश्तों को लेकर बुजुर्ग माताएं परेशान, परिवार के विवाद पहुंचे कानून के दरवाजे तक

पल्लवी वाघेला, भोपाल। बच्चों की जिंदगी में उनकी पसंद को स्वीकार करने के बाद भी जब यही रिश्ता माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बनने लगे तो वे मदद के लिए कानून का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हो रहे हैं। भोपाल में ऐसे दो मामले सामने आए हैं, जिनमें बुजुर्ग महिलाओं ने अपने बच्चों के लिव-इन पार्टनर से परेशानी की शिकायत की है। उनका कहना है कि बिना विवाह के साथ रह रहे पार्टनर अब परिवार और घर पर अपना अधिकार जताने लगे हैं। इनमें डालसा पहुंचे मामले में समझौता कराया गया है। वहीं महिला आयोग पहुंचे मामले में दोनों पक्षों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।
अलग-अलग घर में रहने पर तैयार
एक बुजुर्ग महिला ने डालसा में शिकायत कर बताया कि युवती उसके बेटे के साथ बिना विवाह किए रह रही है। महिला का आरोप था कि लिव-इन पार्टनर की वजह से घर में लगातार विवाद की स्थिति बन रही है और वह बिना वैवाहिक अधिकार के परिवार में अपना हक जता रही है। महिला ने कहा कि लिव इन पार्टनर, उनकी बेटी के ससुराल के मामलों में हस्तक्षेप करती है। इसकी वजह से बेटी के घर में भी तनाव है। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को सामने बैठाकर उनकी बात सुनी गई। इस दौरान दोनों के बीच विवाद और मारपीट की स्थिति भी सामने आई। साथ रहना संभव नहीं होने पर आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग किराये के मकान में रहने के निर्देश दिए, ताकि विवाद की स्थिति आगे न बढ़े। वहीं, युवती से कहा गया कि वह पारिवारिक मामलों में हस्तक्षेप न करे। साथ ही प्रॉपर्टी के संबंध में भी स्पष्ट बताया गया कि युवक की पैतृक प्रॉपर्टी पर उसका सीधा हक नहीं है।
महिला आयोग में लगाई गुहार
दूसरे मामले में भी एक बुजुर्ग मां अपने बेटे के लिव-इन रिश्ते को लेकर परेशान होकर महिला आयोग पहुंची। महिला ने शिकायत में कहा कि बेटे के साथ रह रही महिला बिना विवाह के परिवार का हिस्सा बनने के साथ घर और अन्य मामलों में अपना अधिकार जताती है। वहीं, लिव इन पार्टनर उनके और उनके पति के साथ भी दुर्व्यवहार करती है। इससे मां और बेटे के बीच भी तनाव की स्थिति बन रही है। बुजुर्ग ने कहा कि उनका एक ही बेटा है, इसलिए वह सहती रही, लेकिन तीन साल में वह परेशान हो गई हैं और लिव इन पार्टनर से छुटकारा चाहती हैं। महिला ने कानूनी मदद की मांग की। मामले में दूसरे पक्ष को बुलवाया गया है।
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ले सकते हैं कानूनी मदद
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एडल्ट के बीच अधिकार और जिम्मेदारियों का स्वरूप परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। लेकिन किसी भी रिश्ते में हिंसा, धमकी या जबरन अधिकार जताने की स्थिति उचित नहीं है। परिवार में विवाद होने पर पक्षकारों को पहले संवाद और काउंसलिंग का रास्ता अपनाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कानून की मदद भी ली जा सकती है।
सरिता राजानी, एडवोकेट
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