640 मौतें, सिर्फ 20 पोस्टमार्टम! मणिपुर के राहत कैंपों पर SC सख्त, पूछा- आखिर क्यों नहीं हुई कार्रवाई ?

नई दिल्ली। मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा के बाद राहत कैंपों में रह रहे विस्थापित लोगों की मौतों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इन मौतों को लेकर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगते हुए पूछा कि राहत कैंपों में हुई संदिग्ध और अप्राकृतिक मौतों की जांच के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि कैंपों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, सम्मान, इलाज और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
640 मौतों की रिपोर्ट, पोस्टमार्टम सिर्फ 20 मामलों में
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट के मुताबिक आठ जिलों के राहत कैंपों में कुल 640 मौतें दर्ज की गई थीं। इनमें 34 मौतों को अप्राकृतिक बताया गया था। वहीं, कोर्ट ने रिपोर्टों में सामने आई 25 संदिग्ध मौतों की भी विस्तृत जानकारी मांगी है। अदालत ने खास तौर पर सवाल किया कि जब मौतों से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज हुए थे, तो सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम क्यों कराया गया।
मुआवजे की रकम पर भी कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान राहत कैंपों में हुई मौतों के बाद परिवारों को दिए गए मुआवजे का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने पूछा कि कुछ मामलों में मृतकों के परिवारों को केवल 20 से 30 हजार रुपये का मुआवजा क्यों दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से इस रकम और पूरी प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत ने मुख्य सचिव से मौतों की परिस्थितियों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी हलफनामे के जरिए देने का निर्देश दिया।
हर अप्राकृतिक मौत में FIR और तेज जांच के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को भी इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने को कहा। अदालत ने निर्देश दिया कि अप्राकृतिक मौत के सभी मामलों में FIR दर्ज हो और मौत के असली कारण का पता लगाने के लिए जांच तेजी से की जाए। साथ ही राहत कैंपों में रह रहे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। कैंपों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा और जरूरी रोजमर्रा की चीजें उपलब्ध कराने की बात भी कही गई।
3,020 मामलों की जांच, 302 में चार्जशीट
सुनवाई में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की जांच की स्थिति भी बताई। उनके अनुसार आठ जिलों में 42 विशेष जांच दल बनाए गए हैं। इन टीमों के पास 3,020 मामले हैं। 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है। 1,135 मामलों की जांच अभी जारी है और 33 मामलों में ट्रायल शुरू हो चुका है।
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CBI मामलों के लिए विशेष अदालतों पर भी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि CBI ने मणिपुर हिंसा से जुड़े 31 मामलों की जांच की है और 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। तीन मामलों में जांच अभी जारी है। अदालत ने CBI और NIA से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था पर भी जोर दिया। मणिपुर में जातीय हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी, जिसके बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए।




















