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रूसी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करना चाहता है अमेरिका? भारत पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोप को उकसा रहे अमेरिकी ट्रेजरी चीफ

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रूसी अर्थव्यवस्था को ध्वस्त करना चाहता है अमेरिका? भारत पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूरोप को उकसा रहे अमेरिकी ट्रेजरी चीफ
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और इसी बीच अमेरिका ने रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए और सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने रविवार को साफ कहा कि अगर अमेरिका और यूरोप मिलकर रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और सेकेंडरी टैरिफ लगा दें, तो रूसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ढह सकती है और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मजबूरन शांति वार्ता की मेज पर आना होगा।

    सेकेंडरी टैरिफ से रूस पर दबाव की रणनीति

    स्कॉट बेसेंट ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में कहा कि अब यह एक तरह की रेस है- यूक्रेन की सेना कितने समय तक टिक सकती है और रूसी अर्थव्यवस्था कितने समय तक दबाव सह सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) मिलकर उन देशों पर सेकेंडरी टैरिफ लगाएं जो रूस से कच्चा तेल खरीद रहे हैं, तो इसका असर तुरंत दिखेगा और रूस आर्थिक रूप से टूट जाएगा।

    भारत और चीन पर भी निशाना

    • अमेरिका ने हाल ही में भारत और चीन को "बैड एक्टर्स" बताया है क्योंकि दोनों देश रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदते आ रहे हैं।
    • भारत पर 50% टैरिफ: ट्रंप प्रशासन ने भारत पर पहले से लागू 25% पारस्परिक शुल्क के अलावा 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है।
    • चीन पर 145% टैरिफ: चीन पर भी भारी टैक्स लगाया गया है, हालांकि इसे 90 दिनों के लिए रोक दिया गया है।
    • भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है और पश्चिमी देशों की "हिपोक्रेसी" उजागर की है। भारत का तर्क है कि कई यूरोपीय देश भी रूस से ऊर्जा खरीदते हैं, लेकिन उन्हें इस तरह के कठोर कदमों का सामना नहीं करना पड़ा।

    ट्रंप-पुतिन मुलाकात और असफल प्रयास

    डोनाल्ड ट्रंप सत्ता में आने के बाद से बार-बार यह दावा कर चुके हैं कि वे यूक्रेन युद्ध को खत्म करेंगे। हाल ही में अलास्का में ट्रंप और पुतिन के बीच एक हाई-प्रोफाइल बैठक भी हुई, लेकिन शांति समझौता नहीं हो पाया। ट्रंप ने बैठक को "प्रोडक्टिव" बताया, लेकिन कहा कि "डील तभी होगी जब डील होगी"।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुलाकात की सराहना करते हुए कहा कि भारत हमेशा से यूक्रेन विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है और हर सकारात्मक प्रयास का समर्थन करता है।

    कीव पर रूसी हमला

    इसी बीच रविवार को यूक्रेन युद्ध और तेज हो गया। रूसी सेनाओं ने राजधानी कीव में सरकारी इमारतों पर मिसाइल हमला किया, जिससे आग लग गई और कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन ने रूस की ब्रायंस्क क्षेत्र की द्रुज़्बा ऑयल पाइपलाइन को निशाना बनाया। रूस की तरफ से यूक्रेन पर 800 से ज्यादा ड्रोन दागे गए।

    भारत-अमेरिका संबंधों में नई तनातनी

    भारत ने अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को अनुचित बताया है और साफ कहा है कि ऊर्जा खरीद उसकी अपनी जरूरत है। भारत का कहना है कि पश्चिमी देश भी अपने हितों के लिए रूस से खरीदारी करते हैं, लेकिन केवल भारत और चीन को कठोर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है।

    उधर, अमेरिका का मानना है कि भारत और चीन की तेल खरीद रूस की "वार मशीन" को ताकत देती है। ट्रंप ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा, "हमने भारत पर 50% का बहुत बड़ा टैरिफ लगाया है। मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन हम इस मुद्दे पर बहुत निराश हैं।"

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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