Naresh Bhagoria
4 Feb 2026
नर्मदापुरम। अरहर की दाल स्वास्थ्य और ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। मध्य प्रदेश में अरहर की दाल हर जगह उगाई जाती है, लेकिन पिपरिया तहसील की दाल अपने स्वाद, नरमी और जल्दी पकने की वजह से विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहाँ की उपजाऊ मिट्टी और नर्मदा नदी की सिंचाई इसे उच्च गुणवत्ता वाली बनाती है।
अरहर की दाल न केवल शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि कई बीमारियों से लड़ने में भी मददगार है। इसमें मौजूद प्रोटीन, फाइबर, आयरन, फोलेट और अन्य पोषक तत्व हृदय, पाचन तंत्र और मांसपेशियों के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं। नियमित रूप से अरहर की दाल का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
मध्य प्रदेश में अरहर की दाल हर जगह उगाई जाती है, लेकिन नर्मदापुरम जिले की पिपरिया तहसील विशेष रूप से इस दाल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। पिपरिया की जलवायु और मिट्टी अरहर दाल के लिए अत्यंत अनुकूल हैं, जिससे दाल जल्दी पकती है और उसका स्वाद बेहतर होता है।
नर्मदापुरम जिले की अधिकांश भूमि नर्मदा नदी के पानी से सिंचित होती है। पर्याप्त पानी मिलने के कारण किसानों को उच्च पैदावार मिलती है। पिपरिया क्षेत्र की मिट्टी उपजाऊ और ढीली होने के कारण अरहर की खेती के लिए आदर्श मानी जाती है।
पिपरिया, नर्मदापुरम जिले का एक हिस्सा है और यह नर्मदा नदी तथा सतपुड़ा पर्वत के समीप स्थित है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण क्षेत्र में जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियाँ अरहर की दाल की खेती के लिए उपयुक्त रहती हैं।
पिपरिया तहसील की अरहर दाल का स्वाद, गुणवत्ता और उत्पादकता इसे विशिष्ट बनाती है। इसी कारण अब इस दाल के लिए GI Tag (Geographical Indication Tag) की मांग भी उठी है, जिससे इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।