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ड्रग ले जा रही बोट पर अमेरिकी हवाई हमला :75 दिनों में 21वां अटैक, ट्रंप ने दिया था आदेश

75 दिनों में 21वां अटैक, ट्रंप ने दिया था आदेश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में एक संदिग्ध ड्रग तस्करी वाली नाव पर हवाई हमला किया, जिसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गई। यह अमेरिका द्वारा सितंबर की शुरुआत से अब तक ड्रग तस्करी वाली नावों पर किया गया 21वां हमला है। पेंटागन के अनुसार, अब तक इन अभियानों में कम से कम 83 लोग मारे जा चुके हैं।

    ट्रंप प्रशासन का कहना है कि, ये हमले अमेरिका की ओर जाने वाली ड्रग्स शिपमेंट को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे हैं।

    कैसे हुआ हमला?

    अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार, यह हमला जॉइंट टास्क फोर्स साउदर्न स्पीयर द्वारा अंजाम दिया गया। खुफिया जानकारी के आधार पर पुष्टि हुई कि नाव नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी में शामिल थी। हमला शनिवार को उस समय किया गया जब नाव ड्रग-ट्रैफिकिंग रूट पर जा रही थी। अमेरिकी सेना ने सोशल मीडिया पर इस ऑपरेशन का बयान और वीडियो भी जारी किया।

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    अमेरिका के ड्रग विरोधी अभियान

    यह सितंबर की शुरुआत से अब तक 21वां हमला है। पेंटागन के आंकड़े बताते हैं कि, इन हमलों में अब तक कम से कम 83 लोग मारे गए हैं। ट्रंप प्रशासन ने इन अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि, यह कार्रवाई अमेरिका में ड्रग्स की आपूर्ति को रोकने के लिए आवश्यक है।

    क्षेत्र में बढ़ा तनाव

    हालांकि, अमेरिका का दावा है कि ऑपरेशन कानूनी है, मानवाधिकार संगठन और सहयोगी देशों ने इसके कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं। क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका का सबसे उन्नत विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर फोर्ड कैरिबियाई सागर में तैनात किया गया। नौसेना ने घोषणा की है कि युद्धपोतों, विमान स्क्वाड्रनों और हजारों कर्मियों के साथ यह वाहक ऑपरेशन सदर्न स्पीयर में शामिल हो गया है। इस तरह यह दशकों में कैरिबियाई सागर में अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी उपस्थिति बन गई है।

    अमेरिका का रुख

    ट्रंप प्रशासन का कहना है कि, अगर आगे कोई जहाज अमेरिका की ओर ड्रग्स लेकर आता है तो उसे तुरंत निशाना बनाया जाएगा। अमेरिकी अधिकारी यह भी बताते हैं कि, इस क्षेत्र में ऑपरेशन केवल ड्रग विरोधी अभियान है, लेकिन सहयोगी देशों को इस कदम को लेकर चिंता है। 

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...

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