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सिंगापुर। तेल बाजार इस समय भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। एशियाई बाजारों में बुधवार सुबह कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा नहीं बदलीं और यह एक महीने के उच्च स्तर के पास स्थिर रहीं। इसका बड़ा कारण अमेरिका द्वारा ईरान के तेल उद्योग पर लगाए गए नए प्रतिबंध हैं, जिससे भविष्य में कच्चे तेल की आपूर्ति और सख्त होने की आशंका बढ़ गई है। ब्रेंट ऑयल फ्यूचर्स $69.12 प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड फ्यूचर्स $65.09 प्रति बैरल पर स्थिर रहे। दोनों बेंचमार्क अनुबंध मंगलवार को एक माह के उच्च स्तर तक बढ़ गए थे और बुधवार को भी उसी स्तर के आसपास टिके रहे। इसका मतलब यह है कि निवेशकों के मन में आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
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अमेरिका ने मंगलवार को ईरानी तेल पर सख्त कार्रवाई की। अमेरिकी वित्त विभाग ने उन कंपनियों और जहाजों के नेटवर्क पर पाबंदी लगाई, जो ईरानी तेल को इराकी तेल के रूप में छिपाकर बेच रहे थे। यह कदम वाशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु वार्ता के विफल हो जाने के बाद उठाया गया। प्रतिबंधों का सीधा असर यह होगा कि आने वाले महीनों में ईरान से तेल आपूर्ति और सीमित हो जाएगी, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतें ऊपर रह सकती हैं। भारत को लेकर भी नजरें टिकी हुई हैं। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। इस कदम के बाद यूरोपीय देशों ने भी एक बड़े भारतीय रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाने पर विचार शुरू कर दिया।
खबर है कि सऊदी अरब और इराक ने इस हफ्ते भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी को तेल आपूर्ति रोक दी है। यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को और जटिल बना सकती है। भारत, अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, अब तक रूसी तेल खरीदने से पीछे नहीं हटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में चीन और रूस के नेताओं से भी मिले, जिससे संकेत मिलता है कि भारत अपनी ऊर्जा नीति को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ाने के पक्ष में है। इन सबके बीच बाजार की सबसे बड़ी नजर ओपेक प्लस की बैठक पर है, जो 7 सितंबर को होने वाली है। यह संगठन, जिसमें ओपेक देशों के साथ रूस और अन्य सहयोगी शामिल हैं, वैश्विक तेल आपूर्ति तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। उम्मीद जताई जा रही है कि ओपेक प्लस इस बैठक में उत्पादन को स्थिर रखेगा। दरअसल, इस साल की शुरुआत में संगठन ने बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाया था, लेकिन अब कीमतों में कमजोरी को देखते हुए आगे की बढ़ोतरी रोक सकता है।
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सिर्फ ओपेक प्लस ही नहीं, बल्कि अमेरिका के तेल भंडार (इन्वेंटरी) के आंकड़े भी निवेशकों के लिए अहम रहेंगे। गर्मियों की यात्रा सीजन अब खत्म हो रही है और अनुमान है कि अमेरिका, जो दुनिया का सबसे बड़ा ईंधन उपभोक्ता है, वहां मांग कुछ कम हुई है। इस हफ्ते अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान और ऊर्जा सूचना प्रशासन इन्वेंटरी डेटा जारी करेंगे, जो बाजार की दिशा तय करने में मदद करेगा। कुल मिलाकर, तेल बाजार इस समय कई कारकों से प्रभावित हो रहा है। इनमें अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव, भारत पर दबाव, रूस की आपूर्ति और ओपेक प्लस की रणनीति जैसे कुछ कारण अहम हैं। कीमतें अभी ऊंचे स्तर पर टिके रह सकती हैं, लेकिन असली तस्वीर आने वाले दिनों में ओपेक प्लस की बैठक और अमेरिकी भंडार के आंकड़ों के बाद ही साफ होगी।