US-Iran War :10वीं रात भी बरसे अमेरिकी बम, ईरान का कुवैत में जवाबी हमले का दावा; हूती विद्रोहियों की सऊदी के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी

तेल अवीव/तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जबकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की बात कही है। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर संघर्ष को नया मोर्चा दे दिया है। इन घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इसका असर वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान पर की एयरस्ट्राइक
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 20 जुलाई की रात ईरान के खिलाफ लगातार 10वीं सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। इस अभियान में ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हमले के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार एयरस्ट्राइक में सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, तटीय निगरानी केंद्र तथा सैन्य संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया।
ईरान के कई शहरों में हुए धमाके, बुशहर में हाई अलर्ट
ईरानी मीडिया के अनुसार, सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार, कोनारक, जास्क और शिराज समेत कई इलाकों में देर रात विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। बुशहर में स्थित ईरान के प्रमुख परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। सरकारी मीडिया ने तबरीज के पास हुए एक हमले में एक व्यक्ति की मौत की भी जानकारी दी है। इसके बाद पूरे दक्षिणी ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।
ईरान का दावा- कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किया हमला
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और कामिकाजे ड्रोन से जवाबी कार्रवाई की है। ईरानी सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार कैंप अरिफजान, कैंप अल-अदीरी, अहमद अल-जाबेर एयर बेस और अली अल सालेम एयर बेस को निशाना बनाया गया। हालांकि अमेरिका या कुवैत की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
HIMARS मिसाइल सिस्टम और अमेरिकी रडार को निशाना बनाने का दावा
ईरान ने कहा कि ऑपरेशन 'साएकेह' (Thunderbolt) के तहत कुवैत के कैंप अरिफजान में तैनात अमेरिकी HIMARS मिसाइल सिस्टम पर सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं। इसके अलावा IRGC ने दावा किया कि अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर अमेरिकी अर्ली वॉर्निंग रडार, FPS-117 रडार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल डिफेंस रडार और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को भी निशाना बनाया गया। ईरान ने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के हैंगर पर हमला करने का भी दावा किया है, लेकिन इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बहरीन में भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि बहरीन के मुहर्रक और रिफा क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। ईरान के मुताबिक, इन हमलों में अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, कतर ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद को पत्र भेजकर ईरानी हमलों की निंदा की है और हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी की है।
हूतियों ने सऊदी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का किया ऐलान
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने संघर्ष को नया मोर्चा देते हुए बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के जहाजों की आवाजाही रोकने का ऐलान किया है। हूतियों ने चेतावनी दी है कि सऊदी अरब से जुड़े सभी जहाज अब उनके निशाने पर होंगे। इस घोषणा ने लाल सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य क्यों है दुनिया के लिए अहम?
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप तथा एशिया के बीच समुद्री व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है। दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत समुद्री व्यापार और रोजाना 60 से 70 लाख बैरल तेल की सप्लाई इसी मार्ग से होती है। यदि यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक सप्लाई चेन, शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में ऑयल टैंकर पर हमला
ओमान के लिमाह तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक ऑयल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, हमले के बाद चालक दल ने जहाज छोड़ दिया और लाइफबोट के जरिए सुरक्षित स्थान पर पहुंच गया। वहीं, ईरान ने दावा किया कि होर्मुज के दक्षिणी मार्ग से गुजर रहे दो अन्य तेल टैंकरों में भी विस्फोट हुए, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
युद्ध के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी जारी
सैन्य कार्रवाई के बीच बातचीत के प्रयास भी तेज हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के गृह मंत्री पाकिस्तान पहुंचे हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशें चल रही हैं। पाकिस्तान इस पूरे विवाद में अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो क्षेत्र में तनाव कम होने की संभावना बन सकती है।
तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी
लगातार सैन्य कार्रवाई के बावजूद मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.4 प्रतिशत गिरकर 88.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड लगभग 82.47 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर रहा। विश्लेषकों का कहना है कि यदि बातचीत सफल होती है तो तेल बाजार में और राहत मिल सकती है, लेकिन संघर्ष बढ़ने पर कीमतों में फिर तेजी आ सकती है।
क्यों बढ़ गई है पूरी दुनिया की चिंता?
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। अब होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग भी इस संघर्ष की चपेट में आते दिखाई दे रहे हैं। इन रास्तों से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यदि युद्ध और लंबा खिंचता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतों, व्यापार, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी हुई है।











