भारत-अमेरिका की दोस्ती से क्यों जलते हैं दूसरे देश? अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया

भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रही साझेदारी की जमकर तारीफ की। गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हैं और यही वजह है कि कुछ दूसरे देश इस साझेदारी से परेशान नजर आते हैं। जानकारी के अनुसार, सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका के बीच रक्षा, व्यापार और कूटनीति से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने दोनों देशों के नेताओं के बीच लगातार हो रहे उच्च स्तरीय संपर्क को भी अहम बताया।
PM मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप, लिस्ट में सबसे ऊपर नाम
सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत रिश्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा जाए कि विदेश से आने वाले नेताओं में वह किससे मिलना चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर होंगे।
गोर के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल भी भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का फ्लोरिडा दौरा सिर्फ बहुपक्षीय बैठक तक सीमित नहीं रहेगा। हालांकि, अभी तक मोदी और ट्रंप के बीच किसी आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक की घोषणा नहीं हुई है।
अगले साल भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल भारत का दौरा कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जाएगी। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, तकनीक, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। ऐसे में ट्रंप की संभावित भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।
व्यापार समझौते पर भी गोर ने दिया अपडेट
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी सर्जियो गोर ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समझौते पर दोबारा काम किया जा रहा है। गोर ने दावा किया कि दोनों देश व्यापार समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा समझौता भारत और अमेरिका दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा और इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूती मिल सकती है।
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PM मोदी की गोर ने की जमकर तारीफ
सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि PM मोदी ने भारत में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गोर के मुताबिक, भारत में स्थिरता बढ़ने से अमेरिका के साथ उसकी साझेदारी भी मजबूत हुई है। उन्होंने भारत को अमेरिका का भरोसेमंद रक्षा साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग अब केवल हथियारों की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझेदारी कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है।
कश्मीर पर भी दे चुके हैं बड़ा बयान
सर्जियो गोर हाल ही में जम्मू-कश्मीर को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण भी सुर्खियों में आए थे। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया था। गोर के इस बयान पर पाकिस्तान ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। पाकिस्तान को अमेरिकी राजदूत का यह बयान पसंद नहीं आया और उसने इस्लामाबाद में मौजूद अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
पाकिस्तान ने अमेरिका के सामने दर्ज कराया विरोध
पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने वाले बयान को खारिज कर दिया। इस्लामाबाद ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित क्षेत्र है। पाकिस्तान ने गोर के बयान को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए कहा कि यह जम्मू-कश्मीर को लेकर उसके रुख के खिलाफ है। पाकिस्तान ने यह भी आरोप लगाया कि इस तरह का बयान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। वहीं, भारत लंबे समय से स्पष्ट रूप से कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाला जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा हैं।
भारत-अमेरिका रिश्तों में नया अध्याय?
सर्जियो गोर के ताजा बयानों से साफ है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक रूप से काफी अहम मान रहा है। रक्षा से लेकर व्यापार और कूटनीति तक दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। PM मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंधों को भी इस साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। अब सबकी नजर दिसंबर में होने वाले जी-20 सम्मेलन और आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर है।


















