इंदौर की बादशाहत पर 11 नवंबर को फैसला! लगातार 8 बार के स्वच्छता चैंपियन के सामने फिर खिताब बचाने की चुनौती

इंदौर। स्वच्छता के मामले में लगातार आठ बार देश में पहला स्थान हासिल कर चुका इंदौर एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम रखने की तैयारी में है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के परिणाम 11 नवंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में घोषित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के लिए इंदौर को भी आमंत्रण मिला है। अब शहरवासियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इंदौर लगातार नौवीं बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनने का गौरव हासिल कर पाता है या नहीं। इस बार भी इंदौर की सबसे बड़ी ताकत उसकी व्यवस्थित सफाई व्यवस्था, घर-घर से कचरा संग्रहण और कचरे का छह अलग-अलग श्रेणियों में पृथक्करण है। शहर ने सफाई को केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थानों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि घरों से निकलने वाले कचरे को एकत्र करने से लेकर उसके वैज्ञानिक निस्तारण और पुनः उपयोग तक की पूरी व्यवस्था विकसित की है।
संबंधित खबर: इंदौर की 5000 बिल्डिंगों को नोटिस:ऑडिट रिपोर्ट नहीं तो लिफ्ट सील,नौलखा लिफ्ट हादसे के बाद निगम का बड़ा एक्शन!
हर घर और दुकान तक पहुंचती है कचरा गाड़ी
इंदौर के स्वच्छता मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन व्यवस्था है। शहर के सभी 85 वार्डों में घरों और दुकानों से नियमित रूप से कचरा उठाने के लिए निर्धारित मार्गों पर कचरा संग्रहण वाहन संचालित किए जाते हैं। इससे लोगों को सड़कों या खुले स्थानों पर कचरा फेंकने की जरूरत नहीं पड़ती। नगर निगम की इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरे को उसके शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना है, ताकि शहर में गंदगी और कचरे के ढेर जमा न हों।
संबंधित खबर: इंदौर नगर निगम द्वारा बिना ट्रेड लाइसेंस चल रहीं 14 दुकानें सील:57 कारोबारियों ने कराया लाइसेंस रिन्यू
छह श्रेणियों में बांटा जाता है घरेलू कचरा
इंदौर की सफाई व्यवस्था की दूसरी बड़ी खासियत कचरे का स्रोत पर ही पृथक्करण है। यहां घरों से निकलने वाले कचरे को छह श्रेणियों में अलग-अलग रखने की व्यवस्था है। इनमें गीला, सूखा, प्लास्टिक, सैनिटरी, घरेलू हानिकारक और ई-वेस्ट शामिल हैं।इस व्यवस्था से अलग-अलग प्रकार के कचरे का उचित तरीके से निस्तारण करना आसान होता है। नगर निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर भी छह श्रेणियों में कचरा पृथक्करण और डोर-टू-डोर कलेक्शन को इंदौर के स्वच्छता मॉडल की प्रमुख विशेषता बताया गया है।
ये भी पढ़ें: दिवाली के बाद हवा में घुला जहर! सांस, आंखों और त्वचा पर पड़ सकता है बुरा असर
कचरे से खाद और बायो-सीएनजी तैयार
इंदौर में कचरे को केवल उठाकर फेंकने के बजाय उससे उपयोगी संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया गया है। गीले कचरे से खाद और बायो-सीएनजी बनाई जाती है। वहीं, सूखे कचरे को मटेरियल रिकवरी सेंटर में अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है।इस तरह शहर में कचरे का अधिकतम उपयोग करने और उसे संसाधन में बदलने की व्यवस्था विकसित की गई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में प्रतिदिन लगभग 700 टन गीला और 1200 टन सूखा कचरा निकलता है। रिपोर्ट में डोर-टू-डोर कलेक्शन का कवरेज 100 प्रतिशत और स्रोत पर कचरा पृथक्करण 98 प्रतिशत बताया गया था।
ये भी पढ़ें: देवास में मिलावटखोरों सक्रिय :10.80 क्विंटल मावा एवं मिठाइयां जब्त, स्वीट्स संचालक पर FIR
देपालपुर को भी स्वच्छता मॉडल से जोड़ा
इस बार इंदौर की स्वच्छता उपलब्धियों के साथ देपालपुर में किए गए कार्य भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्र सरकार के स्वच्छ शहर जोड़ी अभियान के तहत इंदौर को देपालपुर का मेंटर बनाया गया था। इसके अंतर्गत देपालपुर में भी कचरा संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए।केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार, देपालपुर में चार श्रेणियों में कचरा संग्रहण और पृथक्करण की व्यवस्था लागू की गई। इसके अलावा वहां पिछले पांच वर्षों से जमा करीब 1250 टन पुराने कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण भी किया गया।
ये भी पढ़ें: Poland Shooting: पोलैंड के क्राको में सरेआम फायरिंग और भीड़ में घुसाई कार; 6 लोगों की मौत, संदिग्ध के घर से मिले 3 शव
इस बार इंदौर के साथ मॉडल की भी परीक्षा
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में इंदौर की उपलब्धि केवल शहर की सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रहेगी। स्वच्छ शहर जोड़ी अभियान के तहत देपालपुर में किए गए कार्य भी इस बार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इंदौर ने अपने स्वच्छता मॉडल को दूसरे शहरों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम किया है।




















