बद्रीनाथ धाम की पहाड़ी पर लगी भीषण आग, 2 किलोमीटर दूर तक दिखीं लपटें, वन विभाग की टीम जुटी; 3 दिन में दूसरी घटना से बढ़ी चिंता

बद्रीनाथ धाम की पहाड़ी पर शनिवार रात भीषण आग लग गई। लपटें 2 किलोमीटर दूर से दिखाई दीं। तीन दिन में दूसरी घटना से वन विभाग की चिंता बढ़ी।
बद्रीनाथ धाम की पहाड़ी पर लगी भीषण आग, 2 किलोमीटर दूर तक दिखीं लपटें, वन विभाग की टीम जुटी; 3 दिन में दूसरी घटना से बढ़ी चिंता
तीन दिन में दूसरी बार आग से दहला बद्रीनाथ

बद्रीनाथ। उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बद्रीनाथ धाम में एक बार फिर पहाड़ी पर आग लगने से हड़कंप मच गया है। शनिवार रात पहाड़ी पर अचानक आग की लपटें उठने लगीं। आग इतनी दूर तक दिखाई दे रही थी कि करीब 2 किलोमीटर दूर से भी लपटों को देखा जा सकता था। कुछ ही देर में पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया और कर्मचारियों की टीम को मौके पर रवाना किया गया। पहाड़ी पर खड़ी चट्टानें और दुर्गम रास्ते आग बुझाने के काम में बाधा बन रहे हैं। वनकर्मियों की टीम देर रात तक आग पर काबू पाने की कोशिश करती रही। खास बात यह है कि बद्रीनाथ धाम में पिछले तीन दिनों के भीतर आग लगने की यह दूसरी घटना है। लगातार हो रही घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

बद्रीनाथ धाम की पहाड़ी पर अचानक भड़की आग

शनिवार रात बद्रीनाथ धाम की एक पहाड़ी पर अचानक आग लग गई। अंधेरे के बीच पहाड़ी से उठती आग की लपटें काफी दूर तक दिखाई दे रही थीं। बताया जा रहा है कि करीब 2 किलोमीटर की दूरी से भी आग को देखा जा सकता था। आग की वजह से आसपास के इलाके में धुएं का गुबार फैल गया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। विभाग की ओर से कर्मचारियों की एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया। टीम ने मौके पर पहुंचकर आग की स्थिति का जायजा लिया और उसे बुझाने के प्रयास शुरू किए।

खड़ी चट्टानों के कारण आग बुझाने में आ रही परेशानी

बद्रीनाथ की पहाड़ी पर आग बुझाना वनकर्मियों के लिए आसान नहीं है। घटनास्थल पर खड़ी चट्टानें और दुर्गम पहाड़ी रास्ते होने के कारण टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वन विभाग के कर्मचारी लगातार आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं। टीम आग की दिशा और फैलाव पर भी नजर बनाए हुए है, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल आग लगने की असली वजह सामने नहीं आई है। इसके अलावा आग से वन संपदा और आसपास के क्षेत्र को कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन भी नहीं किया जा सका है। आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही नुकसान की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

तीन दिन पहले माता मूर्ति मंदिर के पास भी लगी थी आग

बद्रीनाथ धाम में आग लगने की यह पहली घटना नहीं है। इससे महज तीन दिन पहले भी माता मूर्ति मंदिर के पास पहाड़ी पर आग लग गई थी। मंदिर के ठीक ऊपर पहाड़ी से आग की लपटें उठने लगी थीं। देखते ही देखते आसपास के इलाके में धुआं फैल गया था। उस समय आग खेतों में लगी थी और करीब 200 से 300 वर्ग फीट क्षेत्र में फैल गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने में जुट गई। काफी मशक्कत के बाद कर्मचारियों ने आग पर काबू पाया था। अब एक बार फिर बद्रीनाथ धाम की दूसरी पहाड़ी पर आग लगने से इलाके में चिंता बढ़ गई है। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में वन सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

बद्रीनाथ में बार-बार क्यों लग रही है आग?

पहाड़ी क्षेत्रों में नवंबर के दौरान आग लगने की घटनाओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं। बद्रीनाथ धाम में भी आग लगने की घटनाओं को लेकर कुछ संभावित वजहें सामने आ रही हैं।

1. सूखी घास और झाड़ियों में आग का खतरा- नवंबर के महीने में बारिश और नमी की कमी के कारण पहाड़ियों पर उगी घास, पत्तियां और छोटी झाड़ियां सूखने लगती हैं। सूखी वनस्पति आग पकड़ने के लिए अनुकूल होती है। ऐसे में छोटी सी चिंगारी भी बड़े क्षेत्र में आग फैला सकती है।

2. मानवीय लापरवाही या जानबूझकर आग लगाना- जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में आग लगने की एक बड़ी वजह मानवीय गतिविधियां भी हो सकती हैं। कई बार जलती हुई वस्तु फेंकने या अन्य लापरवाही के कारण आग फैल जाती है। माता मूर्ति मंदिर के पास हुई पिछली घटना में भी किसी व्यक्ति द्वारा आग लगाए जाने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

3. तेज हवा से तेजी से फैल सकती है आग- पहाड़ी इलाकों में हवा की गति आग के फैलाव को प्रभावित करती है। तेज हवा चलने पर आग सूखी घास और झाड़ियों के जरिए तेजी से दूसरे हिस्सों तक पहुंच सकती है। इससे आग बुझाने का काम और मुश्किल हो जाता है।

4. दुर्गम पहाड़ी रास्ते बनते हैं बड़ी चुनौती- बद्रीनाथ जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में कई स्थानों पर खड़ी चट्टानें और कठिन रास्ते हैं। ऐसे इलाकों में दमकल और राहत दल के उपकरण पहुंचाना आसान नहीं होता। वन विभाग की टीम को भी आग तक पहुंचने और उसे नियंत्रित करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।

चमोली में सबसे ज्यादा मामले

उत्तराखंड में जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। वन विभाग के 8 नवंबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में कुल 657 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें अकेले चमोली जिले में 221 घटनाएं सामने आई हैं। ये आंकड़े पहाड़ी क्षेत्रों में वनाग्नि की चुनौती को दिखाते हैं। चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम सहित कई संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र आते हैं। ऐसे में यहां आग की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण करना जरूरी है।

बद्रीनाथ धाम में वन संपदा की सुरक्षा बड़ी चुनौती

बद्रीनाथ धाम धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। यहां की पहाड़ियां, वनस्पति और प्राकृतिक वातावरण इस क्षेत्र की खास पहचान हैं। बार-बार आग लगने की घटनाएं वन संपदा और पर्यावरण के लिए खतरा बन सकती हैं। फिलहाल वन विभाग की टीम आग बुझाने और स्थिति पर नजर रखने में जुटी है। आग लगने के कारणों और नुकसान का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। अब यह देखना अहम होगा कि विभाग इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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