यमन में सऊदी अरब का बड़ा हमला, 33 की मौत और 39 घायल, महिलाएं और बच्चे भी शामिल

यमन की राजधानी सना के पास सऊदी अरब के हवाई हमलों ने भारी तबाही मचा दी है. इस हमले में 33 लोगों की मौत हो गई, जबकि 39 लोग घायल बताए जा रहे हैं. मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. हूती विद्रोहियों के कब्जे वाली समाचार एजेंसी सबा और यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना की जानकारी दी है. बताया जा रहा है कि हमले में कई घरों को निशाना बनाया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने यमन की राजधानी सना के पूर्व में स्थित बनी हुशैश गांव पर हवाई हमले किए. यह इलाका हूती विद्रोहियों का मजबूत गढ़ माना जाता है. हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. कई मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और उनके मलबे में लोग फंस गए. राहत और बचाव दल लोगों को बाहर निकालने में जुटे हैं. जुलाई 2026 में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच दोबारा लड़ाई शुरू होने के बाद यह सबसे खतरनाक हमलों में से एक माना जा रहा है.
बचाव अभियान के दौरान भी हुए हमले
सना के सेहतुना अस्पताल के निदेशक अब्दुल-अजीज अल-दैलामी ने बताया कि हवाई हमले के बाद कई लोग अब भी मलबे में फंसे हुए हैं. इनमें आम लोगों के साथ बचाव दल के सदस्य भी शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी बचावकर्मी मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पहुंचते हैं, उसी दौरान दोबारा हमला हो जाता है. इससे राहत और बचाव का काम भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने बताया कि इन हमलों में कुछ मेडिकल कर्मचारियों की भी जान चली गई है. वहीं, अस्पताल में भर्ती घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है. कई लोगों के सिर, छाती और पैरों में चोटें आई हैं. कुछ घायलों की हड्डियां भी टूट गई हैं. अस्पताल में घायलों का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले पर सऊदी अरब के सेंटर फॉर इंटरनेशनल कम्युनिकेशन ने कहा है कि वह पूरे घटनाक्रम की जांच कर रहा है. हालांकि, हमले में हुई मौतों और नुकसान को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं.
2022 में हुआ था युद्धविराम, लेकिन जुलाई 2026 में फिर शुरू हुई जंग
सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है. साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हुआ था. इसके बाद दोनों तरफ से होने वाले हमलों में काफी कमी आई थी और हालात कुछ हद तक सामान्य होने लगे थे। हालांकि, जुलाई 2026 में दोनों पक्षों के बीच एक बार फिर लड़ाई शुरू हो गई. हूती विद्रोही ईरान समर्थित संगठन हैं और यमन की राजधानी सना समेत देश के कई इलाकों पर उनका नियंत्रण है. हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और तेल ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इसके जवाब में सऊदी अरब यमन में अपने सहयोगी संगठनों की मदद कर रहा है और हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है. इसी संघर्ष के बीच बनी हुशैश गांव पर हुए ताजा हमले ने आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
12 साल से जारी युद्ध ने यमन को संकट में डाला
यमन में पिछले करीब 12 साल से गृहयुद्ध जैसे हालात बने हुए हैं. इस संघर्ष का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे बड़े तनाव से भी जुड़ा है. लगातार जारी लड़ाई ने अरब देशों के सबसे गरीब देशों में शामिल यमन की हालत और खराब कर दी है। देश में पहले से ही गरीबी, बेरोजगारी और खाने-पीने की चीजों की कमी जैसी समस्याएं हैं. अब लगातार हो रहे हवाई हमलों ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. घरों के तबाह होने और सुरक्षा का खतरा बढ़ने के कारण हजारों परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के मुताबिक, जुलाई 2026 में लड़ाई दोबारा शुरू होने के बाद से 2 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. कई परिवारों के पास रहने के लिए सुरक्षित जगह नहीं है। फिलहाल यमन में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं. सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते संघर्ष का सबसे ज्यादा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. ताजा हमले में 33 लोगों की मौत और 39 लोगों के घायल होने की खबर ने एक बार फिर युद्ध के गंभीर मानवीय असर को सामने ला दिया है।




















