8 साल का इंतजार, करोड़ों खर्च फिर भी सूखे नल! हरसूद में पेयजल योजना बनी शोपीस

खंडवा के हरसूद में करोड़ों रुपये की वृहद पेयजल योजना आठ साल बाद भी पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है। घरों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा। वार्ड 10 में ट्यूबवेल की मोटर खराब है और मुख्य पाइपलाइन फूटी हुई है। एक तरफ लोग पानी के लिए परेशान हैं, दूसरी तरफ हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है।
8 साल का इंतजार, करोड़ों खर्च फिर भी सूखे नल! हरसूद में पेयजल योजना बनी शोपीस

हरसूद। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद में पेयजल संकट से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहां आठ साल पहले करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई वृहद पेयजल योजना अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो सकी है। नया हरसूद पुनर्वास स्थल और छनेरा के आठ वार्डों में घर-घर नल कनेक्शन तो पहुंचा दिए गए हैं, लेकिन इनसे नियमित पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है। ऐसे में लोगों के घरों में लगे नल महज शोपीस बनकर रह गए हैं।

हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद द्वारा योजना को एमपीयूडीसी को हैंडओवर किए करीब चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक लोगों को इसका लाभ नहीं मिला है। दूसरी ओर, पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था भी बदहाल है। कहीं ट्यूबवेल की मोटर खराब है तो कहीं मुख्य पाइपलाइन फूटने से हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। ऐसे में लोगों के सामने पेयजल संकट लगातार बना हुआ है।

2018 में मिली थी योजना को मंजूरी, मई 2022 था काम पूरा करने का लक्ष्य

नया हरसूद पुनर्वास स्थल और छनेरा के आठ वार्डों में पेयजल समस्या दूर करने के लिए वर्ष 2018 में वृहद पेयजल योजना को मंजूरी दी गई थी। करीब दो साल बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसे मई 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि, निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार और संबंधित एजेंसी की लापरवाही के चलते तय समय पर काम पूरा नहीं हो सका। अब आठ साल बीतने के बाद भी योजना पूरी तरह चालू नहीं हो पाई है। घरों में नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी नहीं पहुंचने से योजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।

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योजना को एमपीयूडीसी को सौंपे करीब चार महीने हो चुके हैं, लेकिन जलापूर्ति शुरू नहीं होने से लोगों को अब भी पुराने जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को चिंता है कि अगर जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो गर्मी के मौसम में परेशानी और बढ़ सकती है।

वार्ड 7 से 10 तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था पर असमंजस

वृहद पेयजल योजना के तहत वार्ड क्रमांक 7, 8, 9 और 10 में पानी पहुंचाने की व्यवस्था अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इन वार्डों में जलापूर्ति के लिए कभी नगर परिषद कार्यालय के सामने बनी पानी की टंकी से कनेक्शन जोड़ने की बात कही जाती है तो कभी सेक्टर नंबर 8 की टंकी से पानी देने की योजना बताई जाती है।

लेकिन अब तक इन वार्डों के रहवासियों को योजना का लाभ नहीं मिला है। जानकारों के मुताबिक, नगर परिषद कार्यालय के सामने स्थित टंकी से पुनर्वास स्थल के दूसरे वार्डों में सुबह से देर रात तक पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में वार्ड 7 से 10 तक इसी टंकी से पानी पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इन वार्डों को फिल्टर प्लांट की पानी की टंकी से जोड़कर जलापूर्ति की जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है। इसके बावजूद जरूरी काम पूरे नहीं होने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है।

वार्ड 10 में 4-5 दिन से ट्यूबवेल की मोटर खराब

नई पेयजल योजना शुरू नहीं होने के साथ पुरानी व्यवस्था भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। वार्ड क्रमांक 10 में रेलवे स्टेशन रोड स्थित ट्यूबवेल की मोटर पिछले चार-पांच दिनों से खराब पड़ी है। इसके कारण आसपास के रहवासियों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ट्यूबवेल की मोटर महीने में कई बार खराब हो जाती है। बार-बार समस्या आने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। दीपावली की तैयारियों के बीच पानी की सप्लाई बाधित होने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

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मुख्य पाइपलाइन फूटी, सड़क पर बह रहा हजारों लीटर पानी

वार्ड क्रमांक 10 में पंप हाउस के पास मुख्य पाइपलाइन भी क्षतिग्रस्त है। इससे रोजाना हजारों लीटर पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है। एक तरफ लोग पीने के पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी की बर्बादी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पाइपलाइन की मरम्मत और ट्यूबवेल की मोटर ठीक नहीं कराई गई तो समस्या और गंभीर हो सकती है। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग की है।

जिम्मेदार अधिकारियों से नहीं हो सकी बात

पेयजल संकट और वृहद पेयजल योजना की मौजूदा स्थिति को लेकर नगर परिषद के सीएमओ नृपत सिंह और एमपीयूडीसी के इंजीनियर अनिल कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया गया। हालांकि, दोनों अधिकारियों के मोबाइल बंद और आउट ऑफ कवरेज होने के कारण उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

Satyendra Thakur
By Satyendra Thakur

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