क्यों बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले, बचाव के लिए कौन सा मास्क बेहतर? जानिए जरूरी बातें

देश के कई हिस्सों में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामले बढ़ने की खबरों के बीच Influenza A (H1N1), जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ रही है। बदलते मौसम और भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोगों की आवाजाही के बीच संक्रमण से बचाव को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा सवाल है कि H1N1 संक्रमण तेजी से क्यों फैलता है और इससे बचने के लिए किस तरह का मास्क पहनना बेहतर माना जाता है। स्वाइन फ्लू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों और निकट संपर्क के जरिए फैल सकता है। बदलते मौसम में वायरल संक्रमण के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं। इसके अलावा बाजार, ऑफिस, मॉल, स्कूल और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर लंबे समय तक रहने से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की आशंका बढ़ जाती है।
भीड़भाड़ और बदलता मौसम बढ़ा सकता है संक्रमण का खतरा
H1N1 समेत इन्फ्लुएंजा वायरस का संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक मुख्य रूप से सांस से निकलने वाली बूंदों और नजदीकी संपर्क के जरिए पहुंच सकता है। जब बड़ी संख्या में लोग बंद या भीड़भाड़ वाली जगहों पर एक-दूसरे के करीब रहते हैं, तो संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। मानसून और मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह से भी सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है। ऐसे समय में खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने वाले लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के उपायों का ध्यान रखना चाहिए।
H1N1 से बचने के लिए कौन सा मास्क बेहतर?
अगर आप H1N1 जैसे श्वसन संक्रमण से बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क बेहतर विकल्प माना जाता है। खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों, अस्पतालों या फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के नजदीकी संपर्क में आने की स्थिति में अच्छी तरह फिट होने वाला N95 मास्क उपयोगी हो सकता है। N95 मास्क चेहरे पर अच्छी तरह फिट होकर हवा में मौजूद बहुत छोटे कणों को फिल्टर करने के लिए डिजाइन किया जाता है। हालांकि मास्क तभी प्रभावी तरीके से काम करता है, जब वह चेहरे पर सही तरीके से फिट हो और नाक व मुंह को पूरी तरह ढक रहा हो। दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने भी फ्लू जैसे लक्षण होने की स्थिति में N95 मास्क पहनने की सलाह दी है। इसका एक उद्देश्य संक्रमित व्यक्ति से आसपास के लोगों तक संक्रमण के फैलाव को कम करना भी है।
सिर्फ मास्क नहीं, इन बातों का भी रखें ध्यान
संक्रमण से बचने के लिए केवल मास्क पहनना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ रोजमर्रा की कुछ जरूरी सावधानियां अपनाना भी महत्वपूर्ण है। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोते रहें। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकें, ताकि संक्रमण की बूंदें आसपास मौजूद लोगों तक न पहुंचें। गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह को छूने से भी बचना चाहिए, क्योंकि वायरस दूषित सतह या हाथों के संपर्क से भी शरीर तक पहुंच सकता है। अगर आपको फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और दूसरों से दूरी बनाए रखें। जरूरत होने पर घर पर आराम करें और अपनी स्थिति पर नजर रखें।
फ्लू के कौन से लक्षण नजर आ सकते हैं?
H1N1 संक्रमण में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप भी ले सकती है। तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर ऐसे लोगों को लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिन्हें पहले से कोई गंभीर बीमारी है या जिनमें संक्रमण के कारण जटिलता का जोखिम ज्यादा हो सकता है।
लक्षण दिखें तो खुद से दवा न लें
H1N1 एक वायरल संक्रमण है इसलिए इसके लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा शुरू करना सही तरीका नहीं है। एंटीबायोटिक दवाएं वायरल संक्रमण के इलाज के लिए नहीं होती हैं, जबकि एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह और मरीज की स्थिति के आधार पर किया जाता है। इसलिए फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा शुरू करने से बचना चाहिए। अगर लक्षण गंभीर हैं, लगातार बने हुए हैं या सांस लेने में परेशानी जैसी स्थिति पैदा हो रही है, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
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संक्रमण से बचाव में सावधानी सबसे जरूरी
H1N1 से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि लोग संक्रमण के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतें। अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क, हाथों की नियमित सफाई, खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकना और बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद कर सकता है।




















