लोक अदालत में टूटा विवादों का पहाड़, 1.03 अरब से ज्यादा की राशि पर हुआ समझौता

रायपुर: राजधानी रायपुर में वर्ष 2026 की तीसरी नेशनल लोक अदालत में विवादों के त्वरित समाधान की तस्वीर सामने आई। नालसा और सालसा के दिशा-निर्देशों पर आयोजित इस लोक अदालत में न्यायालयीन, राजस्व, पारिवारिक, जनोपयोगी और प्री-लिटिगेशन मामलों का निराकरण किया गया। खास बात यह रही कि कई मामलों में सिर्फ कानूनी विवाद ही खत्म नहीं हुए, बल्कि टूटते पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को भी समझाइश के जरिए बचाया गया।
लोक अदालत में हजारों मामलों का निपटारा
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) के दिशा-निर्देशों के तहत रायपुर में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा सहित न्यायिक अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

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दीप प्रज्ज्वलन से शुरू हुआ आयोजन
उद्घाटन अवसर पर तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय आनंद कुमार ध्रुव, स्थायी जनोपयोगी लोक अदालत के सभापति शांतनु कुमार देशलहरे और अधिवक्ता संघ के सचिव राकेश पुरी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक अधिकारी, राजस्व अधिकारी, नगर निगम कर्मचारी और छात्र-छात्राएं शामिल हुए।
ऑनलाइन भी हुआ मामलों का राजीनामा
इस बार लोक अदालत को हाइब्रिड माध्यम से आयोजित किया गया। पक्षकारों को भौतिक उपस्थिति के साथ-साथ वर्चुअल और ऑनलाइन माध्यम से भी अपने मामलों में आपसी राजीनामा करने की सुविधा दी गई। इससे दूर-दराज के पक्षकारों को भी मामलों के निराकरण में सहूलियत मिली।

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‘किसी की हार नहीं, सबकी जीत’
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने कहा कि लोक अदालत का मूल उद्देश्य आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में किसी की हार नहीं होती, बल्कि समझौते के जरिए सभी पक्षों की जीत होती है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से आर्थिक परेशानी झेल रहे पक्षकारों को अधिकतम राहत देने के निर्देश भी दिए।
मुनादी से सोशल मीडिया तक चला प्रचार अभियान
लोक अदालत की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ट्रैफिक लाउडस्पीकर, रेलवे स्टेशन के अनाउंसमेंट सिस्टम, सोशल मीडिया और ग्रामीण क्षेत्रों में कोटवारों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया गया। गरियाबंद, देवभोग, राजिम और तिल्दा की तालुका विधिक सेवा समितियों के माध्यम से भी लोगों को कानूनी परामर्श दिया गया।

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लोक अदालत में सिर्फ केस नहीं, मदद भी मिली
आयोजन के दौरान समाज कल्याण विभाग के सहयोग से 8 श्रवण यंत्र और 2 ट्रायसाइकिल वितरित की गईं। वहीं श्रम विभाग की ओर से 10 असंगठित कामगारों को श्रमिक कार्ड दिए गए। दूर-दराज से पहुंचे पक्षकारों के लिए गुरुद्वारा धन धन बाबा साहिब जी, तेलीबांधा के सहयोग से निःशुल्क भोजन की व्यवस्था भी की गई।
इन मामलों का हुआ निराकरण
लोक अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार राजस्व न्यायालय से जुड़े 13,42,745 प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय के 103 प्रकरण, न्यायालयों में लंबित करीब 27,296 प्रकरण, प्री-लिटिगेशन एवं नगर निगम से जुड़े 27,296 प्रकरण, जनोपयोगी सेवाओं के 238 प्रकरण, मोहल्ला लोक अदालत के 65 प्रकरण और कमर्शियल कोर्ट का 1 प्रकरण निराकृत किया गया।

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1.03 अरब रुपये से ज्यादा की राशि पर समझौता
लोक अदालत के दौरान कुल ₹1,03,13,61,484 की राशि से जुड़े मामलों का निराकरण किया गया। आंकड़ा बताता है कि लोक अदालत ने केवल छोटे विवादों के समाधान तक सीमित न रहकर बड़ी संख्या में वित्तीय और कानूनी मामलों को भी समझौते के रास्ते पर पहुंचाया।
पति-पत्नी में सुलह, तलाक की याचिका पर बदला फैसला
लोक अदालत में पारिवारिक विवाद का भावनात्मक समाधान भी देखने को मिला। तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश आनंद कुमार ध्रुव की समझाइश के बाद विवाह विच्छेद की याचिका दायर करने वाले एक दम्पति के बीच आपसी सहमति बनी। दोनों ने विवाद खत्म कर साथ रहने का फैसला किया और खुशी-खुशी अपने घर लौटे।

2021 से चल रहा पिता-पुत्र का विवाद खत्म
सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी अमिता कोशिमा रावटे के प्रयासों से वर्ष 2021 से पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहा पिता-पुत्र का विवाद समाप्त हुआ। समझौते के बाद दोनों के बीच रिश्तों में फिर से मधुरता लौट आई।
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धर्म के विवाद पर मानवता की जीत
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रज्ञा सिंह की समझाइश के बाद हिंदू-मुस्लिम पक्षकारों के बीच चल रहा धार्मिक विवाद भी आपसी राजीनामे से खत्म हुआ। अदालत ने पक्षकारों को समझाया कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। इसके बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लिया।




















