गणेश उत्सव में शराबबंदी पर बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार, पुणे में 10 दिन का बैन घटाकर 2 दिन किया गया

चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा कि बिना किसी तर्कसंगत आधार के व्यापक प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि शराब के आदी लोगों पर अचानक लंबा प्रतिबंध स्वास्थ्य संबंधी गंभीर असर डाल सकता है और अस्पतालों में भीड़ बढ़ सकती है। अब 14 सितंबर को शाम 4 बजे तक और 25 सितंबर को पूरे दिन शराब की बिक्री और सेवन पर रोक रहेगी। अदालत ने साफ किया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शराब पी हो या नहीं, कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
10 दिन की शराबबंदी पर कोर्ट की फटकार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को पुणे प्रशासन को गणेश उत्सव के दौरान 10 दिन तक शराब पर रोक लगाने के लिए फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति शराब का आदी है, उसे 10 दिनों तक शराब नहीं मिली तो वह बीमार होकर अस्पतालों में भीड़ लगा सकता है। कोर्ट ने इस तरह के व्यापक प्रतिबंध को उचित आधार के बिना लगाने पर सवाल उठाया।
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सिर्फ पुणे को चुनने पर उठाया सवाल
चीफ जस्टिस एमसी त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की बेंच ने सुनवाई के दौरान पूछा कि सिर्फ पुणे को चुनने के पीछे क्या तर्क है। अदालत ने कहा कि ऐसी प्रथा की निंदा की जानी चाहिए और केवल पुणे के निवासियों के लिए इस तरह का आदेश जारी करना उनके लिए एक तरह का कलंक है। शराबबंदी पूरे महाराष्ट्र में नहीं, बल्कि केवल पुणे जिले के लिए लागू की गई थी।
प्रशासन ने 10 दिन से घटाकर 2 दिन किया बैन
बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद पुणे प्रशासन ने गणेशोत्सव के दौरान 10 दिन की शराबबंदी घटाकर 2 दिन कर दी है। प्रशासन विशेष अवसरों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्राई डे घोषित कर सकता है, लेकिन फैसला मनमाना नहीं होना चाहिए।
'कानून तोड़ने पर की जाएगी कार्रवाई'
अदालत ने कहा कि त्योहार के दौरान कोई व्यक्ति शराब का सेवन कर उत्साह में सड़कों पर निकलता है तो केवल इस आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि वह कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करेगा। हालांकि, अगर कोई व्यक्ति शराब पी हो या नहीं, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली स्थिति पैदा करता है तो उसे कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना होगा।
'प्रशासन और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना आवश्यक'
कोर्ट ने कहा कि शराब पर अचानक और लंबी अवधि के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगाने से उन लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है जो शराब के आदी हैं। नागरिकों और व्यवसायियों को प्रशासन के किसी भी अनुचित या एकतरफा आदेश को अदालत में चुनौती देने का अधिकार है। प्रशासन को जनहित और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
राजस्व,कारोबार और अवैध बिक्री पर असर
10 दिन की शराबबंदी से उत्पाद शुल्क और वैट से मिलने वाली सरकारी आय घट सकती है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव पड़ता है। शराब की दुकानें, बार, होटल, रेस्तरां और सप्लाई चेन प्रभावित होने से कारोबार और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है। वहीं रोक के दौरान अवैध बिक्री और तस्करी बढ़ने का खतरा रहता है, जिससे राजस्व नुकसान के साथ संगठित अपराध और नकली शराब से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं।




















