सीहोर:'ऊपर तक देना पड़ता है' पटवारी पर रिश्वत के आरोप भारी, ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित

सीहोर। मामला श्यामपुर तहसील के ग्राम पथरिया से जुड़ा है। ग्राम पथरिया निवासी भगवान सिंह गुर्जर, दयाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने पटवारी जितेन्द्र कुमार शर्मा के खिलाफ कलेक्टर को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बीपीएल आदेश जारी कराने के नाम पर 5 हजार रुपये और जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए 20 हजार रुपये की कथित मांग की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि अन्य राजस्व कार्यों के लिए भी कथित तौर पर अलग-अलग राशि तय की गई थी।
ऊपर तक देना पड़ता है वाले कथित बयान से बवाल
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जब उन्होंने कथित रूप से मांगी गई राशि देने में असमर्थता जताई तो पटवारी ने कहा कि उसे भी ऊपर तक पैसे देने पड़ते हैं। इसी कथित बातचीत का ऑडियो-वीडियो सामने आने के बाद मामला अचानक सुर्खियों में आ गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल खड़े होने लगे। हालांकि वायरल ऑडियो-वीडियो की प्रमाणिकता और उसमें कही गई बातों की वास्तविकता विभागीय जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
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कथित साक्ष्यों ने बढ़ाया प्रशासनिक दबाव
ग्रामीणों ने शिकायत के साथ ऑडियो-वीडियो साक्ष्य होने का दावा किया और मामले में उनकी फॉरेंसिक जांच कराने की मांग भी की। शिकायत सामने आने के बाद तहसील स्तर पर उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों की जांच की गई। मामला तूल पकड़ने के बाद श्यामपुर तहसीलदार श्याम चंदेले ने प्रथम दृष्टया पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए निलंबन प्रस्ताव एसडीएम को भेजा।
एसडीएम ने तत्काल जारी किया निलंबन आदेश
तहसीलदार की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर एसडीएम तन्मय वर्मा ने पटवारी जितेन्द्र कुमार शर्मा को मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया। प्रशासन की कार्रवाई से साफ है कि राजस्व संबंधी कार्यों में अनियमितता या अवैध राशि मांगने की शिकायतों को लेकर अब विभाग सख्त रुख अपना रहा है।
निलंबन के दौरान सीहोर तहसील कार्यालय रहेगा मुख्यालय
निलंबन अवधि में पटवारी जितेन्द्र कुमार शर्मा का मुख्यालय तहसील सीहोर ग्रामीण निर्धारित किया गया है। आदेश के तहत हल्का सीलखेड़ा क्रमांक 08 का प्रभार तत्काल दूसरे पटवारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित शासकीय रिकॉर्ड और दस्तावेज भी जमा कराने के आदेश जारी किए गए हैं, ताकि राजस्व कार्य प्रभावित न हों और रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
विभागीय जांच में होगी आरोपों की पड़ताल
पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। इसके लिए अलग से आरोप पत्र जारी किया जाएगा। जांच के दौरान ग्रामीणों की शिकायत, उपलब्ध दस्तावेज, कथित ऑडियो-वीडियो और संबंधित राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं या नहीं, यह आगे की विभागीय कार्रवाई में स्पष्ट होगा।
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राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस कार्रवाई ने राजस्व विभाग में आम लोगों से जुड़े कामकाज और कथित लेन-देन को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीपीएल जैसे जनकल्याणकारी मामलों से लेकर जमीन के विवाद और कब्जे से जुड़े राजस्व कार्यों तक आम लोगों को अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी पर अवैध राशि मांगने के आरोप लगते हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई प्रशासन की जवाबदेही तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।




















