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गॉल ब्लैडर में क्यों बनती है पथरी? जानें कारण, लक्षण, बचाव और इलाज

गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में स्टोन एक आम समस्या है। जानिए गॉल स्टोन बनने के प्रमुख कारण, इसके शुरुआती और गंभीर लक्षण, खानपान व लाइफस्टाइल से बचाव के तरीके और इलाज के विकल्प। साथ ही समझें कि किन स्थितियों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है और कब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जानकारी यहां पढ़ें।
गॉल ब्लैडर में क्यों बनती है पथरी? जानें कारण, लक्षण, बचाव और इलाज
Gallbladder Stone

गॉल ब्लैडर यानी पित्ताशय में स्टोन (पित्त की पथरी) आजकल एक आम स्वास्थ्य समस्या है। कई लोगों में शुरुआत में छोटे स्टोन होने के बावजूद कोई खास लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन समय के साथ पथरी का आकार बढ़ सकता है और कुछ मामलों में अचानक तेज दर्द या दूसरी परेशानियां शुरू हो सकती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर गॉल स्टोन संक्रमण, सूजन या पित्त नली में रुकावट जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। इसलिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के तरीकों को जानना जरूरी है।

गॉल ब्लैडर में स्टोन कैसे बनता है?

पित्ताशय में लीवर द्वारा बनाया गया पित्त जमा होता है। इसमें कोलेस्ट्रॉल, बाइल सॉल्ट और बिलीरुबिन जैसे पदार्थ होते हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है या पित्ताशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, तो छोटे-छोटे क्रिस्टल बनने लगते हैं। समय के साथ यही क्रिस्टल जमा होकर पथरी का रूप ले सकते हैं।

गॉल ब्लैडर स्टोन बनने के प्रमुख कारण

  • ज्यादा तला-भुना और हाई फैट वाला भोजन करने से पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है।
  • अधिक वजन और शरीर में अतिरिक्त चर्बी से गॉल स्टोन का खतरा बढ़ सकता है।
  • क्रैश डाइट या बहुत तेजी से वजन कम करने पर पित्त में बदलाव हो सकते हैं।
  • लंबे समय तक भोजन न करने से पित्ताशय नियमित रूप से खाली नहीं हो पाता।
  • डायबिटीज और शरीर में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा स्तर भी जोखिम बढ़ा सकता है।
  • उम्र बढ़ने के साथ गॉल स्टोन होने की संभावना बढ़ सकती है।

गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण

गॉल स्टोन कई बार बिना किसी लक्षण के भी मौजूद रह सकता है। लेकिन लक्षण होने पर आमतौर पर ये समस्याएं दिखाई दे सकती हैं-

  • पेट के ऊपरी हिस्से, खासकर दाईं तरफ अचानक तेज दर्द होना।
  • दर्द कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रह सकता है।
  • तैलीय या भारी भोजन के बाद दर्द बढ़ सकता है।
  • जी मिचलाना और उल्टी होना।
  • पेट फूलना, भारीपन, डकार और अपच की समस्या।
  • दर्द का पीठ या दाहिने कंधे तक फैलना।
  • पथरी पित्त नली में फंसने पर बुखार, ठंड लगना या पीलिया हो सकता है।
  • तेज पेट दर्द के साथ बुखार, लगातार उल्टी या आंखों-त्वचा का पीला पड़ना हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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गॉल स्टोन से बचाव कैसे करें?

  • डाइट में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें।
  • तला-भुना और बहुत ज्यादा फैट वाला भोजन सीमित करें।
  • रोजाना करीब 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की कोशिश करें।
  • पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • लंबे समय तक खाली पेट रहने से बचें और नियमित अंतराल पर भोजन करें।
  • वजन कम करना हो तो धीरे-धीरे और संतुलित तरीके से वजन घटाएं।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के क्रैश डाइट या लंबे समय तक उपवास न करें।

गॉल ब्लैडर स्टोन का इलाज

गॉल स्टोन का उपचार उसके आकार, स्थान और मरीज में मौजूद लक्षणों पर निर्भर करता है। अगर पथरी है लेकिन कोई लक्षण नहीं हैं, तो कई मामलों में डॉक्टर केवल निगरानी की सलाह दे सकते हैं। हल्के लक्षणों में दर्द नियंत्रित करने वाली दवाओं और खानपान में बदलाव की सलाह दी जा सकती है। कुछ चुनिंदा मरीजों में दवाओं के जरिए कोलेस्ट्रॉल वाली पथरी को घोलने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह उपचार हर मरीज के लिए प्रभावी नहीं होता।

अगर बार-बार तेज दर्द, संक्रमण, पीलिया या पैंक्रियाटाइटिस जैसी जटिलताएं होने लगें, तो डॉक्टर गॉल ब्लैडर निकालने की सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। इसे आमतौर पर कोलेसिस्टेक्टॉमी (Cholecystectomy) कहा जाता है।

नोट: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। गॉल ब्लैडर स्टोन के लक्षण होने पर जांच और उपचार के लिए डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह लेना जरूरी है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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