बुखार ठीक होने के बाद सीने में भारीपन और खांसी क्यों? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बुखार शरीर में संक्रमण के खिलाफ होने वाली एक सामान्य प्रतिक्रिया है। वायरल या अन्य संक्रमण में आराम और उचित इलाज के बाद बुखार कुछ दिनों में ठीक हो सकता है। लेकिन बुखार उतरने के बाद भी अगर सीने में जकड़न, भारीपन, खांसी या सांस लेने में परेशानी बनी हुई है, तो इसे केवल कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
संक्रमण के बाद क्यों होती है सीने में जकड़न?
सर्दी-जुकाम, फ्लू या दूसरे श्वसन संक्रमण के बाद कुछ समय तक खांसी, बलगम, सांस फूलना या सीने में जकड़न जैसी परेशानी रह सकती है। संक्रमण के कारण सांस की नलियों में सूजन या बलगम बनने से भी सांस लेने में असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, सीने में जकड़न के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए लगातार बने रहने वाले या बढ़ते लक्षणों का कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
निमोनिया भी हो सकता है एक कारण
कुछ मामलों में संक्रमण फेफड़ों तक पहुंचने पर निमोनिया जैसी समस्या हो सकती है। निमोनिया के सामान्य लक्षणों में खांसी, सांस लेने में परेशानी, बुखार, सीने में दर्द और अत्यधिक थकान शामिल हैं। अगर बुखार ठीक होने के बाद दोबारा तेज बुखार आने लगे, खांसी बढ़ जाए, सांस फूलने लगे या सीने में दर्द-जकड़न बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
कुछ लक्षण गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं। अगर सीने में जकड़न के साथ सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, बोलने में दिक्कत हो, होंठ या त्वचा नीली या बहुत पीली पड़ने लगे, अचानक भ्रम की स्थिति बने या खांसी के साथ खून आए, तो तुरंत मेडिकल मदद लें। इसी तरह सामान्य गतिविधियां करने में भी सांस फूलना, लगातार बढ़ती खांसी या सीने में दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
रिकवरी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
संक्रमण से उबरने के दौरान शरीर को पर्याप्त आराम देना और पानी पीते रहना मददगार हो सकता है। धूम्रपान से बचें, क्योंकि इससे सांस से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड जैसी दवाएं शुरू न करें। एंटीबायोटिक वायरल संक्रमण में काम नहीं करतीं और इनका इस्तेमाल जरूरत के अनुसार डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए। अगर बुखार ठीक होने के बाद भी सीने से जुड़े लक्षण बने हुए हैं या लगातार बढ़ रहे हैं, तो खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।




















