वर्ल्ड फिजियोथैरेपी डे स्पेशल : जहां इलाज की उम्मीद थमी, वहां फिजियोथैरेपी ने बढ़ाए कदम; स्ट्रोक, वेंटिलेटर से लौटे मरीज

वर्ल्ड फिजियोथैरेपी डे पर विशेषज्ञों ने बताया कि स्ट्रोक, लंबे समय तक वेंटिलेटर या आईसीयू में रहने के बाद फिजियोथैरेपी मरीज की खोई शारीरिक क्षमता वापस पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित पुनर्वास, सही समय पर उपचार और परिवार के सहयोग से मरीज रोजमर्रा के कामों के लिए दोबारा आत्मनिर्भर बन सकता है।
 जहां इलाज की उम्मीद थमी, वहां फिजियोथैरेपी ने बढ़ाए कदम; स्ट्रोक, वेंटिलेटर से लौटे मरीज
फाइल फोटो

भोपाल। कभी बिस्तर से उठना मुश्किल होता है, कभी हाथ-पैर जवाब दे देते हैं और कई बार मरीज बोलने या निगलने तक की क्षमता खो देता है। ऐसे समय में फिजियोथैरेपी केवल एक्सरसाइज नहीं, बल्कि मरीज को दोबारा आत्मनिर्भर बनाने की प्रक्रिया बन जाती है। स्ट्रोक के बाद शरीर का एक हिस्सा निष्क्रिय हो जाने से लेकर लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद मांसपेशियों में कमजोरी और सूजन तक, नियमित पुनर्वास मरीज की खोई क्षमताओं को वापस लाने में मदद कर सकता है। भोपाल में फिजियोथैरेपिस्ट के पास पहुंचे ऐसे मरीजों के अनुभव बताते हैं कि शुरुआती अवस्था में सही तरीके से शुरू की गई थैरेपी और लगातार अभ्यास से छोटे-छोटे सुधार बड़ी उपलब्धि में बदल सकते हैं। वर्ल्ड फिजियोथैरेपी डे पर फिजियोथैरेपिस्ट बताते हैं कि इसका लक्ष्य सिर्फ मरीज को चलाना नहीं, बल्कि उसे रोजमर्रा के कामों के लिए फिर से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।

केस-1: स्ट्रोक के बाद बंद हो गया था हाथ-पैर, अब खुद करती हैं रोजमर्रा के काम 

प्रीति (परिवर्तित नाम), 35, को ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण ब्रेन हैमरेज के साथ स्ट्रोक हुआ था। दाहिने हाथ-पैर ने काम करना बंद कर दिया था और वह बोल भी नहीं पा रही थीं। उपचार के बाद डॉक्टरों ने फिजियोथैरेपी की सलाह दी। कई महीनों तक फिजियोथैरेपी और स्पीच थैरेपी से उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ। अब वह अपने रोजमर्रा के काम खुद कर लेती हैं और स्पीच थैरेपी की मदद से अपनी बात भी पूरी तरह व्यक्त कर पाती हैं।

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केस-2 : वेंटिलेटर के बाद शरीर में सूजन, फिजियोथैरेपी से फिर स्वस्थ हुए

केपी श्रीवास्तव (परिवर्तित नाम), 60, लंबे समय से ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित थे। फेफड़ों में संक्रमण के कारण उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। लंबे समय तक गंभीर स्थिति में रहने से हाथ-पैर में सूजन यानी लिम्ब एडिमा हो गई। पल्मोनोलॉजिस्ट की सलाह पर आईसीयू में ही फिजियोथैरेपी शुरू की गई। बाद में फेफड़ों की एक्सरसाइज के साथ जनरल एक्सरसाइज कराई गई। लगातार पुनर्वास से उनकी स्थिति में सुधार हुआ और अब वह स्वस्थ हैं।

प्रक्रिया नहीं उपचार का हिस्सा

फिजियोथैरेपी को बीमारी के बाद की प्रक्रिया मानने के बजाय उपचार का हिस्सा समझना चाहिए। स्ट्रोक में जितनी जल्दी सुरक्षित तरीके से पुनर्वास शुरू होता है, मरीज की कार्यक्षमता वापस लाने की संभावना उतनी बेहतर होती है। लगातार अभ्यास और परिवार का सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। 

डॉ. सुनील पांडे, अध्यक्ष, भौतिक चिकित्सा संघ

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आईसीयू के मरीजों के लिए उपयोगी

फिजियोथैरेपी केवल हड्डी या मांसपेशियों की समस्या तक सीमित नहीं है। आईसीयू में भर्ती मरीजों में भी सांस की एक्सरसाइज, शरीर की गतिविधियां और कमजोरी कम करने के लिए इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मरीज को सही समय पर दी गई थैरेपी रिकवरी को बेहतर बना सकती है।

डॉ. तपस्या तोमर, वरिष्ठ फिजियोथैरेपिस्ट

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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