'पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया'... महाप्रबंधक को सुमित्रा महाजन का तीखा पत्र

इंदौर। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष एवं इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन (ताई) ने पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक रामश्रय पांडे को एक तीखा पत्र लिखकर इंदौर की लगातार हो रही रेल उपेक्षा पर गहरी नाराजगी जताई है। ताई ने पत्र में साफ शब्दों में लिखा कि "ऐसा प्रतीत होता है कि पश्चिम रेलवे ने इंदौर को अनाथ समझ लिया है।" उन्होंने कहा कि प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने और लगभग 40 लाख की आबादी के बावजूद इंदौर को उसकी जरूरत के अनुरूप रेल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
नई ट्रेनें नहीं, पुराने प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में
ताई ने पत्र में लिखा कि इंदौर के लिए नई यात्री ट्रेनें शुरू करने के बजाय अन्य रेलवे जोनों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव भी वर्षों से लंबित पड़े हैं। उत्तर पश्चिम रेलवे की जयपुर-इंदौर और पश्चिम मध्य रेलवे की रीवा-इंदौर ट्रेन के प्रस्ताव अब तक अधर में हैं।
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MEMU रैक हटाकर पुराने DEMU चलाने पर सवाल
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित MEMU सेवा का रैक इंदौर से हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई। पत्र में कहा गया कि शहर से आधुनिक MEMU रैक हटाकर उसकी जगह पुराने और बार-बार खराब होने वाले DEMU रैक चलाए जा रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि इंदौर के यात्रियों को दोयम दर्जे का माना जा रहा है।
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पुणे ट्रेन बंद, दूसरी ट्रेनों को मिला वैकल्पिक मार्ग
सुमित्रा महाजन ने कहा कि पुणे-इंदौर ट्रेन लंबे समय से बंद है, लेकिन उसे वैकल्पिक मार्ग से शुरू करने का प्रयास नहीं किया गया। वहीं अजमेर और ग्वालियर की ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पटना और गुवाहाटी ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है, जबकि त्रिवेंद्रम-इंदौर एक्सप्रेस, जिसकी उपयोगिता 625 प्रतिशत से अधिक है, उसके फेरों में भी वृद्धि नहीं की गई।
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महू-उज्जैन लोकल और अयोध्या ट्रेन की भी उठाई मांग
पत्र में ताई ने महू-उज्जैन के बीच लोकल ट्रेन सेवा शुरू करने और अयोध्या के लिए सीधी रेल सेवा उपलब्ध कराने की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना है कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जो इंदौर की उपेक्षा को दर्शाते हैं।
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'लाइन और प्लेटफॉर्म नहीं' तर्क पर जताई आपत्ति
सुमित्रा महाजन ने पत्र में लिखा कि लक्ष्मीबाई नगर में दो अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, महू में अतिरिक्त लाइन क्षमता और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। इसके बावजूद हर मांग पर केवल यह कहना कि लाइन और प्लेटफॉर्म उपलब्ध नहीं हैं, उचित नहीं है। उन्होंने महाप्रबंधक को याद दिलाया कि उन्होंने हाल ही में स्वयं इस क्षेत्र का दौरा किया है, इसलिए वे वास्तविक स्थिति से भली-भांति परिचित हैं।
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'शब्दों के पीछे की पीड़ा समझिए'
पत्र के अंत में ताई ने लिखा कि कई बार ऐसा लगता है कि ऐसी अधूरी सुविधाओं से अच्छा तो कोई सुविधा ही नहीं होती। उन्होंने महाप्रबंधक से कहा कि वे एक सक्षम अधिकारी हैं और इन शब्दों के पीछे छिपी इंदौरवासियों की पीड़ा और भावना को अवश्य समझेंगे। साथ ही उम्मीद जताई कि शहर को उसकी आवश्यकता के अनुरूप रेल सुविधाएं दिलाने के लिए गंभीर पहल की जाएगी।












