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वंदे भारत भी नहीं चल पाएगी!ट्रेन की पटरी पर पड़े ये पत्थर करते हैं इतना बड़ा काम, 99% लोग नहीं जानते

ट्रेन की पटरी के नीचे और आसपास दिखने वाले छोटे-छोटे पत्थर सिर्फ सजावट के लिए नहीं होते। ये रेलवे ट्रैक को मजबूत, सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन पत्थरों को बैलास्ट कहा जाता है, जो तेज रफ्तार ट्रेनों के वजन, कंपन और दबाव को संभालने में मदद करते हैं।
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ट्रेन की पटरी पर पड़े ये पत्थर करते हैं इतना बड़ा काम, 99% लोग नहीं जानते
रेलवे ट्रैक से जुड़ी कई खास बातें।

नई दिल्ली। भारत में रोजाना लाखों लोग ट्रेन से सफर करते हैं लेकिन रेलवे ट्रैक से जुड़ी कई खास बातें आज भी लोगों को पता नहीं होतीं। आपने अक्सर देखा होगा कि पटरियों के आसपास छोटे-छोटे पत्थर बिछे होते हैं। कई लोगों को लगता है कि ये सिर्फ खाली जगह भरने के लिए डाले जाते हैं लेकिन इनका काम इससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। इन पत्थरों के बिना ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है। हाई स्पीड ट्रेनों के लिए तो इनकी भूमिका और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है।

रेलवे ट्रैक पर क्यों बिछाए जाते हैं पत्थर?

ट्रेन की पटरी पर बिछे इन पत्थरों को बैलास्ट कहा जाता है। ये आम पत्थर नहीं होते, बल्कि खास तरह के मजबूत पत्थरों को तोड़कर तैयार किए जाते हैं। इन्हें रेलवे ट्रैक के नीचे स्लीपरों के आसपास लगाया जाता है। इनका मुख्य काम पटरी को अपनी जगह पर मजबूत बनाए रखना और ट्रेन के भारी वजन को संभालना होता है।

ट्रेन के वजन को संभालता है बैलास्ट

एक ट्रेन का वजन हजारों टन तक हो सकता है। जब ट्रेन तेज रफ्तार से गुजरती है, तो पटरी पर बहुत ज्यादा दबाव और कंपन पैदा होता है। बैलास्ट इन झटकों को कम करता है और वजन को जमीन तक सही तरीके से पहुंचाने में मदद करता है। अगर ये पत्थर नहीं होंगे तो पटरी कमजोर होकर हिल सकती है और हादसे का खतरा बढ़ सकता है।

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बारिश में भी ट्रैक को सुरक्षित रखते हैं ये पत्थर

रेलवे ट्रैक के आसपास पानी जमा होना बहुत नुकसानदायक हो सकता है। बैलास्ट पत्थरों के बीच खाली जगह होती है, जिससे बारिश का पानी आसानी से नीचे चला जाता है। इससे स्लीपर और पटरी के आसपास की जमीन कमजोर नहीं होती। यही वजह है कि रेलवे ट्रैक को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में इन पत्थरों का बड़ा योगदान होता है।

कंपन और शोर को कम करने में मददगार

जब ट्रेन तेज गति से चलती है तो पटरी में कंपन पैदा होता है। बैलास्ट इन कंपन को सोखने का काम करता है, जिससे सफर ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित बनता है। अगर पटरी के नीचे सिर्फ मिट्टी होती तो ट्रेन चलने पर ज्यादा झटके और तेज आवाज महसूस होती।

घास और पौधों को रोकने का भी काम

रेलवे ट्रैक के बीच अगर मिट्टी होगी तो वहां घास और छोटे पौधे उग सकते हैं। पौधों की जड़ें धीरे-धीरे ट्रैक को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बैलास्ट पत्थर इस समस्या को रोकते हैं क्योंकि इनके बीच पौधों का उगना आसान नहीं होता।

वंदे भारत जैसी ट्रेनों के लिए क्यों जरूरी हैं ये पत्थर?

आज के समय में वंदे भारत जैसी तेज रफ्तार ट्रेनें चल रही हैं। इन ट्रेनों के लिए मजबूत और स्थिर ट्रैक बहुत जरूरी होता है। बैलास्ट की सही गुणवत्ता और रखरखाव से ही तेज गति वाली ट्रेनें सुरक्षित तरीके से चल पाती हैं। समय के साथ पुराने पत्थरों को हटाकर उनकी जगह नए बैलास्ट डाले जाते हैं ताकि ट्रैक की मजबूती बनी रहे।

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रेलवे इंजीनियरिंग का अहम हिस्सा है बैलास्ट

रेलवे ट्रैक की मजबूती के पीछे कई तकनीकी कारण होते हैं और बैलास्ट उनमें से एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये छोटे-छोटे पत्थर दिखने में साधारण लग सकते हैं लेकिन ट्रेन की सुरक्षा, रफ्तार और आरामदायक सफर में इनकी भूमिका बहुत बड़ी होती है।

Aditi Rawat
By Aditi Rawat

अदिति रावत | MCU, भोपाल से M.Sc.(न्यू मीडिया टेक्नॉलजी) | एंकर, न्यूज़ एक्ज़िक्यूटिव की जिम्मेदारिय...Read More

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