Naresh Bhagoria
9 Jan 2026
भोपाल। 1998 बैच के IAS अधिकारी व स्काउट गाइड के मानसेवी सचिव राजेश मिश्रा का गुरुवार को निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। मिश्रा को सुबह सीने में दर्द की तकलीफ होने पर नेशनल अस्पताल में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने दोपहर 3.30 बजे अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार सुबह 11.30 बजे भदभदा विश्रामगृह में किया जाएगा। शोक संतप्त परिवार में उनकी पत्नी डॉ निशा मिश्रा नेत्र विशेषज्ञ हैं। उल्लेखनीय है कि राजेश मिश्रा अपने सेवाकाल में बैतूल के कलेक्टर रहे। वे संस्कृति विभाग के संचालक भी रहे। रिटायर्ड IAS संजय बंधोपाध्याय और अजीत कुमार, मिश्रा के बहनोई हैं। मिश्रा के पिता भी IPS रहे हैं। उनके दामाद IRS अधिकारी हैं। हाल ही में हुई IAS Service Meet के दौरान भी वे अपने साथियों के साथ शामिल हुए थे। उनका व्यवहार मिलनसार रहा।
IAS राजेश मिश्रा अपने कार्य करने के तरीके और व्यवहार के कारण सर्विस और रिटायर होने के बाद भी सर्वप्रिय बने रहे। उनके निधन पर अनेक अधिकारियों ने शोक व्यक्त किया है। कुछ अधिकारियों उनके साथ बिताए पलों को साझा किया-
'मेरा उनके साथ करीब 35 वर्ष का साथ रहा है। सर्विस के दौरान और रिटायर होने के बाद भी वे मेरे साथ निरंतर संपर्क में रहे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे अपने कर्तव्य के प्रति दृढ़ निश्चयी और समर्पित अधिकारी थे। मैंने उन्हें हर कार्य को उत्साह के साथ करते हुए देखा है। जब मैं सेक्रेटरी था, तब वे प्रोटोकॉल ऑफिसर थे। इसके साथ ही वे बहुत ही हेल्पफुल थे। अपने अधिकारियों, सहयोगियों और सामान्य लोगों को भी किसी तरह की मदद होती तो सहयोग करने के लिए तत्पर रहते थे। ब्यूरोक्रेट और राजनीतिज्ञों के बीच भी समान रूप से प्रिय थे। सभी के साथ उनका व्यवहार ऐसा था कि वे सबके प्रिय बने रहे।'
यूके सामल, रिटायर्ड ACS
'भरोसा नहीं हो रहा...इतनी कम उम्र में राजेश का जाना बड़ा वैक्यूम छोड़ गया। मुझे बड़ा भाई मानता था। ईश्वर ने उसे सहज, सरल, पॉजिटिव, हंसमुख और अलमस्त 'विटी' नेचर भरपूर बख्शा था। 'एरोगेंसी' तो जरा भी नहीं थी। भोपाल में हम लोगों के बीच सामाजिक प्राणि राजेश ही था। यही कारण था कि उसकी मित्रता का दायरा भी बड़ा व्यापक था। एक बार जिससे मिल ले अपनी अमिट छाप छोड़ देता था। मित्रों की पार्टी उसके बगैर अधूरी रहती थीं।'
अजातशत्रु श्रीवास्तव, रिटायर्ड IAS
'राजेश उम्र में भले ही मुझसे छोटा था लेकिन हमारे बीच गहरी मित्रता थी। उसकी खुशमिजाजी के चलते मित्रों के बीच 'चमकता सितारा' था। खुले दिमाग और मिलनसार स्वभाव के साथ राजेश के देश भर में बड़े ही व्यापक संबंध थे। हम लोग एकेडमी में साथ रहे। इसके अलावा स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में भी हम लोग सीनियर-जूनियर रहे। उनके पिता प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस और डीजीपी भी थे। परिवार में अखिल भारतीय सर्विस के कई सदस्य हैं। हम लोग कई साल तक एकांत पार्क में गपशप के साथ 'मार्निंग वाक' एंजॉय करते रहे। उसे घर से पार्क तक ले जाने की ड्यूटी मेरी थी।'
योगेंद्र शर्मा रिटायर्ड IAS