Manisha Dhanwani
9 Jan 2026
दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने के बाद हुई झड़प और पथराव के एक दिन बाद पुलिस ने छह और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है।
गुरुवार को गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की पहचान अफान, आदिल, शाहनवाज, हमजा, अथर और उबेद के रूप में हुई है। सभी आरोपी तुर्कमान गेट इलाके के ही रहने वाले बताए जा रहे हैं। इन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गुरुवार को इनकी जमानत याचिका पर सुनवाई होनी है।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (सेंट्रल) निधिन वलसन ने बताया कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। इलाके में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है, ताकि दोबारा कोई अप्रिय स्थिति न बने।
यह हिंसा मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात रामलीला मैदान क्षेत्र में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भड़की थी। इस दौरान भीड़ ने जमकर पत्थरबाजी की और पुलिस और एमसीडी टीम को निशाना बनाया।
पथराव की इस घटना में थाना प्रभारी (एसएचओ) सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात उस समय और बिगड़ गए, जब सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में मस्जिद को गिराया जा रहा है।
अफवाह फैलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस का दावा है कि इस हिंसा में करीब 150 से 200 लोग शामिल थे, जिन्होंने पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं।
दिल्ली नगर निगम के डिप्टी कमिश्नर कुमार कुमार ने साफ किया कि कार्रवाई के दौरान करीब 36 हजार वर्ग फीट अतिक्रमण हटाया गया। इसमें एक डायग्नोस्टिक सेंटर, एक बैंक्वेट हॉल और दो चारदीवारी शामिल थीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
पुलिस को इस हिंसा के पीछे साजिश की आशंका है। मामले की जांच के लिए करीब 450 वीडियो फुटेज देखे जा रहे हैं। इनमें सीसीटीवी, ड्रोन, बॉडीकैम और सोशल मीडिया पर अपलोड वीडियो शामिल हैं। जांच में करीब 30 लोग पुलिस के रडार पर हैं।
जांच में सामने आया है कि 4 से 5 वॉट्सऐप ग्रुप और 10 सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर के जरिए अफवाहें फैलाई गईं। ये संदेश पुराने धार्मिक, कम्युनिटी और फ्रेंड्स ग्रुप्स में शेयर किए गए थे, जिससे माहौल भड़काया गया।
हिंसा के वक्त मौके पर मौजूद समाजवादी पार्टी के सांसद महिबुल्लाह नदवी की भूमिका भी जांच के घेरे में आ गई है। पुलिस उन्हें जांच में शामिल करने के लिए समन भेजने की तैयारी कर रही है। वीडियो फुटेज में उनके समर्थकों को पुलिस से उलझते हुए देखा गया है।
पुलिस का कहना है कि बॉडीकैम और ड्रोन फुटेज से साफ है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल चिन्हित इलाके तक सीमित थी। मस्जिद के पास तक पुलिस नहीं पहुंची थी।
फिलहाल पुलिस हिंसा के पीछे की पूरी साजिश, अफवाह फैलाने वालों और इसमें शामिल सभी लोगों तक पहुंचने के लिए जांच को और तेज कर रही है।