'सरकार जवाबदेही ले तभी टूटेगा अनशन...'सोनम वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले बढ़ा सियासी तापमान

सोनम वांगचुक ने 23 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के लिए सरकार और राजनीतिक दलों के सामने तीन शर्तें रखी हैं। संसद मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जानिए उनकी मांगें, अस्पताल में लगाए आरोप, CJP का प्रदर्शन और पूरे घटनाक्रम की अहम जानकारी।
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सोनम वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें, संसद मार्च से पहले बढ़ा सियासी तापमान
सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी तीन शर्तें।

नई दिल्ली। करीब 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपने अनशन को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है। संसद मार्च से ठीक पहले उन्होंने कहा कि वह 20 जुलाई को अपना अनशन खत्म कर देंगे, लेकिन इसके लिए सरकार और राजनीतिक दलों को उनकी तीन शर्तों में से कम से कम एक शर्त पूरी करनी होगी।

वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि, उनका आंदोलन केवल उनकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और राजनीतिक दलों से संसद में इस विषय को मजबूती से उठाने की अपील की है।

क्या हैं सोनम वांगचुक की तीन शर्तें?

वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं।

शर्त

मांग

पहली

सरकार शिक्षा व्यवस्था की हालिया नाकामियों और NEET समेत पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

दूसरी

उन्हें और CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद तक जाने दिया जाए तथा विभिन्न दलों के सांसद शिक्षा सुधार और जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाने का भरोसा दें।

तीसरी

अगर स्वास्थ्य कारणों से वह संसद नहीं जा पाते हैं तो अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसद सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यही आश्वासन दें।

वांगचुक का कहना है कि, अगर इन तीनों में से कोई एक शर्त भी पूरी होती है तो वह अपना आमरण अनशन समाप्त कर देंगे।

सफदरजंग अस्पताल में 'अवैध हिरासत' का आरोप

सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में अपनी स्थिति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में उन्हें गैर-कानूनी तरीके से रोका गया है। उनके मुताबिक अस्पताल परिसर के अंदर उनकी आवाजाही, लोगों से मिलने, बातचीत करने और अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। उन्होंने इसे अपने मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।

Twitter Post

किन मुद्दों को लेकर कर रहे हैं आंदोलन?

वांगचुक 28 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं-

  • NEET समेत विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की जवाबदेही तय करना।
  • शिक्षा व्यवस्था में सुधार।
  • परीक्षा अनियमितताओं पर कार्रवाई।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग।
  • छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही।
  • लद्दाख के पर्यावरण और संस्कृति की सुरक्षा।
  • लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण।
  • राज्य का दर्जा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे लंबित मुद्दों पर केंद्र सरकार से संवाद।

पत्नी ने भी रखी थी यही मांग

वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी इससे पहले कहा था कि, अगर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और नेता सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यह भरोसा दिलाते हैं कि वे संसद के मानसून सत्र में शिक्षा सुधार और जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे, तभी सोनम वांगचुक अपना अनशन समाप्त करेंगे।

संसद मार्च से पहले दिल्ली में भारी सुरक्षा

सोमवार को CJP की ओर से जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का कार्यक्रम रखा गया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। सुबह प्रदर्शनकारियों ने कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश भी की, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण कर लिया।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि, पूरा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और किसी भी तरह की हिंसा आंदोलन को नुकसान पहुंचाएगी।

Sonam Wangchuk

दिल्ली में किन-किन जगहों पर सुरक्षा बढ़ाई गई?

संसद मार्च को देखते हुए राजधानी में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।

  • नई दिल्ली जिले में धारा 163 (BNSS) लागू।
  • संसद, जंतर-मंतर और सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में तीन-स्तरीय सुरक्षा।
  • अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती।
  • कई प्रमुख मार्गों पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग।
  • नई दिल्ली में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों की जांच।
  • संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे CCTV निगरानी।
  • रिजर्व पुलिस बल और रैपिड रिस्पॉन्स टीमें अलर्ट पर।

कई मेट्रो स्टेशन भी किए गए बंद

सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने कुछ प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित की हैं।

प्रभावित स्टेशन

  • जनपथ
  • राजीव चौक
  • पटेल चौक
  • सेंट्रल सेक्रेटेरिएट
  • सेवा भवन

क्या बिना अनुमति संसद मार्च निकाला जा सकता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है। हालांकि सार्वजनिक रैली, जुलूस या संसद मार्च निकालने के लिए प्रशासन से अनुमति लेना आवश्यक होता है। अगर अनुमति नहीं होने के बावजूद जुलूस निकाला जाता है और कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो पुलिस उसे रोक सकती है और संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।

संभावित कानूनी कार्रवाई

कानून

प्रावधान

BNS धारा 223

सरकारी आदेश का उल्लंघन

BNS धारा 189

अवैध जमावड़ा

BNS धारा 190

अवैध समूह के सदस्य की जिम्मेदारी

BNS धारा 191

हिंसा या दंगा

BNS धारा 221

सरकारी कार्य में बाधा

PDPP Act

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान

23 दिनों में क्या-क्या हुआ? 

तारीख

घटनाक्रम

28 जून

जंतर-मंतर पर आमरण अनशन शुरू।

9 जुलाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी के निर्देश दिए।

16 जुलाई

डॉक्टरों ने बताया कि 9 किलो से अधिक वजन घट चुका है और ऑर्गन फेलियर का खतरा बढ़ रहा है।

17 जुलाई

वजन घटकर करीब 56.55 किलो पहुंचा।

18 जुलाई

दिल्ली पुलिस वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई।

19 जुलाई

अस्पताल में भर्ती को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई, निजी अस्पताल भेजने की मांग खारिज।

20 जुलाई

संसद मार्च से पहले वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए तीन शर्तों का ऐलान किया।

सरकार से बातचीत के संकेत

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार की ओर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि संगठन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अब अंतिम फैसला सरकार को लेना है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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