PU Special :कटनी में स्कूल की बदली तस्वीर,12 लाख खुद खर्च कर शिक्षक ने बनाया सपनों का स्कूल

रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। कहते हैं अगर इरादा मजबूत हो तो संसाधन खुद-व-खुद जुट जाते हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण है कटनी जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर अंतिम छोर पर बसा शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय गौरा। जहां प्रभारी प्रधानाध्यापक महेन्द्र सिंह ठाकुर ने अपने वेतन से 12 लाख रुपए खर्च कर जर्जर स्कूल को प्राइवेट स्कूलों से भी सुंदर बना दिया।
शिक्षण गुणवत्ता थी कमजोर
यह विद्यालय विकासखंड ढीमरखेड़ा में स्थित है। गांव आदिवासी बाहुल्य है, 90 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा के नीचे कृषि मजदूरी पर निर्भर हैं। स्कूल में 80 छात्र-छात्राएं हैं, 3 नियमित और 2 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। 2015 से शाला प्रभारी का दायित्व सहायक शिक्षक महेन्द्र सिंह ठाकुर निभा रहे हैं। पहले स्कूल असुविधाओं से भरा, उदासीन और भययुक्त था। शाला त्यागी बच्चों की भरमार थी, पालक सरकारी की जगह प्राइवेट स्कूल में प्रवेश दिलाते थे। शिक्षण गुणवत्ता भी कमजोर थी।
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बच्चों को अपने खर्च से कपड़े और स्टेशनरी दी
ठाकुर ने टीम बनाकर सर्वे किया। पता चला गरीब परिवार पेट भरने के लिए पलायन करते हैं। उन्होंने पंचायत और बड़े किसानों से मिलकर गांव में ही मजदूरी की व्यवस्था कराई। बच्चों को अपने खर्च से कपड़े, स्टेशनरी दी। फिर खुद के वेतन से बचत कर स्कूल की मरम्मत, पुताई, टीएलएम चित्रकारी, समतलीकरण, उपजाऊ मिट्टी भरकर गार्डन, पुस्तकालय, डेस्क-बेंच, पर्दे, एलसीडी टीवी, प्रोजेक्टर, सरस्वती मंदिर, फव्वारा, कृत्रिम झरना और 500 फल-फूलदार पेड़ लगाए। आज स्कूल आनंददायी और भयमुक्त है। नतीजा यह हुआ कि गांव के सभी बच्चों ने 100 प्रतिशत सरकारी स्कूल में प्रवेश ले लिया और गांव के निजी स्कूल बंद हो गए।
हर शिक्षक एक सप्ताह का प्रधानाध्यापक
महेन्द्र सिंह ठाकुर ने लीडरशिप प्रशिक्षण के बाद अनोखा नवाचार किया। हर शिक्षक को बारी-बारी से एक सप्ताह के लिए प्रधानाध्यापक बनाया। इससे सभी में जिम्मेदारी और समता का भाव जागा और चमत्कारी परिणाम मिले।
शिक्षक की जुबानी
प्रभारी महेन्द्र सिंह ठाकुर ने कहा कि शिक्षा उदर पोषण से बड़ी है, यह समझाना जरूरी था। हम सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, संगीत, चित्रकारी, इलेक्ट्रिकल, वेल्डर, उद्यानिकी, लोकनृत्य, कंप्यूटर, सिलाई-कढ़ाई जैसे व्यावसायिक प्रशिक्षण भी देते हैं। अवकाश के दिनों में भी मोहल्ला क्लास लगाते हैं। हमारा लक्ष्य बच्चों को विश्व स्तर पर नाम रोशन कराना है।
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