PU Special :शिक्षक दिवस विशेष : दृष्टिहीनता को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया; सैकड़ों विद्यार्थियों की जिंदगी में ज्ञान का उजाला

दृष्टिहीनता को चुनौती बनाकर शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल कायम करने वाले शिक्षक आधार सिंह चौहान और राजकुमार रघुवंशी आज भी विद्यार्थियों का भविष्य संवार रहे हैं। एक ने करीब चार दशक तक कई पीढ़ियों को पढ़ाया, वहीं दूसरे ब्रेल के जरिए तैयारी कर सामान्य विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ा रहे हैं। दोनों की कहानी शिक्षक दिवस पर जज्बे और समर्पण की प्रेरक मिसाल है।
शिक्षक दिवस विशेष : दृष्टिहीनता को कमजोरी नहीं, ताकत बनाया; सैकड़ों विद्यार्थियों की जिंदगी में ज्ञान का उजाला
इंदौर के दृष्टिहीन शिक्षक आधार सिंह चौहान क्लास में।

प्रभा उपाध्याय, इंदौर। आंखों की रोशनी चली गई, लेकिन जिंदगी में आगे बढ़ने और दूसरों का भविष्य संवारने की रोशनी कभी कम नहीं हुई। दृष्टिहीनता को अपनी कमजोरी मानने के बजाय इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया और शिक्षा को अपना माध्यम बनाया। राजकुमार रघुवंशी और आधार सिंह चौहान ऐसे ही दो शिक्षक हैं, जिन्होंने अपनी सीमाओं से आगे बढ़कर विद्यार्थियों को ज्ञान दिया। एक आज भी सामान्य विद्यार्थियों को इतिहास पढ़ा रहे हैं, तो दूसरे करीब चार दशक की शिक्षकीय यात्रा में कई पीढ़ियों को शिक्षा दे चुके हैं। शिक्षक दिवस पर इन दोनों शिक्षकों की कहानी बताती है कि शिक्षक की असली पहचान उसकी आंखों से नहीं, उसकी सोच और उसके विद्यार्थियों की सफलता से होती है।

केस-1: चार दशक की कक्षा, आज भी विद्यार्थियों के बीच

आधार सिंह चौहान ने करीब चार दशक तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्होंने दृष्टिबाधित और सामान्य, दोनों वर्गों के विद्यार्थियों को पढ़ाया। इतिहास और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को वे किताब के पन्नों तक सीमित नहीं रखते थे, बल्कि कहानी-किस्सों और रोचक उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों तक पहुंचाते थे। चौहान बताते हैं कि उन्हें पूरा पाठ्यक्रम याद रहता था। कक्षा में विद्यार्थियों के बीच घूमकर अनुशासन बनाए रखना और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना भी उनकी शिक्षण शैली का हिस्सा था। उनके पढ़ाए कई विद्यार्थी आज बैंक, रेलवे और अन्य सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। कुछ छात्र-छात्राएं सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी भी कर रहे हैं। यानी उनकी कक्षा खत्म होने के बाद भी उनके पढ़ाए विद्यार्थियों की जिंदगी में उनकी सीख का असर बना हुआ है।

खेल, शिक्षा और सामाजिक सेवा में भी पहचान 

आधार सिंह चौहान को शिक्षा, खेल और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई सम्मान मिले हैं। वर्ष 1987 में उन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में विक्रम पुरस्कार मिला था। वर्ष 2019 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा। दृष्टिबाधित लोगों को रोजगार दिलाने और उन्हें सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के क्षेत्र में भी उन्होंने काम किया है।

आधार सिंह सर ने फ्री पढ़ाई कराई

बचपन में ब्रेल लिपि सीखने में कठिनाई होती थी, आधार सिंह सर ने मुझे निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई। उनके समझाने का तरीका बहुत अच्छा है। उनका सामान्य ज्ञान बेहद मजबूत है। उनकी दी हुई शिक्षा के कारण ही आज में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की इंदौर ब्रांच में प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ) हूं।

शिखा सोनी, बैंककर्मी (दृष्टिहीन)

केस-2: ब्रेल में तैयारी, सवालों से पूरी कक्षा पर पकड़

/img/89/1788536297634

राजकुमार रघुवंशी वर्तमान में शारदा कन्या विद्यालय में इतिहास पढ़ाते हैं। पूर्णतः दृष्टिहीन रघुवंशी ने इतिहास में एमए और बीएड किया है। वर्ष 2021 से वे सामान्य विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। कक्षा में पढ़ाने की तैयारी उनके लिए दूसरे शिक्षकों से अलग है। वे ब्रेल लिपि की किताबों के माध्यम से पाठ तैयार करते हैं और विद्यार्थियों को वही पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं, जो अन्य स्कूलों में पढ़ाया जाता है। कक्षा में वे लगातार सवाल करते हैं, विद्यार्थियों से जवाब लेते हैं और उनकी सहभागिता बनाए रखते हैं। रघुवंशी के मुताबिक, विद्यार्थियों के मन में यह जानने की उत्सुकता रहती है कि एक दृष्टिहीन शिक्षक किस तरह पढ़ाते हैं। यही उत्सुकता कई बार उन्हें पढ़ाई पर और अधिक ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

Latest Posts