क्या आपका पार्टनर आपको ‘Taken for Granted’ लेने लगा है? इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें!

रिश्ते की शुरुआत में पार्टनर एक-दूसरे के लिए समय निकालते हैं, छोटी बातों का ध्यान रखते हैं और साथ रहने के मौके तलाशते हैं। समय के साथ यह उत्साह थोड़ा कम होना सामान्य है लेकिन परेशानी तब शुरू होती है जब एक व्यक्ति लगातार कोशिश करता रहे और दूसरा उसकी मौजूदगी को तय मानकर चलने लगे। अगर आपको लग रहा है कि आपकी बात, समय और भावनाओं की पहले जैसी अहमियत नहीं रही, तो इसे समझना जरूरी है। ऐसे व्यवहार को कई बार ‘टेकन फॉर ग्रांटेड’ लेना कहा जाता है। इसका मतलब है कि सामने वाला आपको बिना अतिरिक्त प्रयास के हमेशा उपलब्ध मानने लगे।
आपकी कोशिश अब उसे सामान्य लगती है?
अगर आप पार्टनर के लिए बार-बार उसकी पसंद का खाना बनाते हैं, उसके मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं या छोटी-छोटी चीजों से उसे खुश करने की कोशिश करते हैं लेकिन बदले में आपको धन्यवाद या सराहना तक नहीं मिलती, तो यह ध्यान देने वाला संकेत है। समस्या सिर्फ तारीफ की नहीं है। असली बात यह है कि क्या आपका पार्टनर आपके प्रयासों को समझता और उनकी कद्र करता है।
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दिल की बात सुनने के बजाय टाल देना
जब आप अपनी परेशानी या भावनाएं साझा करते हैं, तो पार्टनर का ध्यान से सुनना जरूरी है। अगर वह बार-बार आपकी बात काट देता है, विषय बदल देता है या आपकी भावनाओं को यह कहकर टाल देता है कि आप बेवजह सोच रहे हैं, तो रिश्ते में भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। हर बार आपकी भावनाओं को छोटा समझना स्वस्थ रिश्ते की निशानी नहीं है।
साथ होते हुए भी नहीं मिलता क्वालिटी टाइम
एक ही जगह मौजूद रहना और साथ समय बिताना अलग बातें हैं। अगर पार्टनर हर समय फोन, दोस्तों या काम में व्यस्त रहता है और आपके लिए समय निकालने की कोशिश नहीं करता, तो आपको अपने रिश्ते के संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। जरूरी नहीं कि हर दिन डेट हो, लेकिन बातचीत और साथ के लिए थोड़ी जगह दोनों तरफ से बननी चाहिए।
क्या रिश्ते में सिर्फ आप ही कर रहे हैं कोशिश?
रिश्ता तब मजबूत रहता है जब दोनों लोग अपनी तरफ से प्रयास करते हैं। अगर बातचीत शुरू करने, मिलने का प्लान बनाने, झगड़े के बाद सुलह करने और रिश्ते को संभालने की जिम्मेदारी हमेशा आपकी रहती है, तो यह एकतरफा रिश्ता महसूस हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा चलना आपको भावनात्मक रूप से थका सकता है।
भविष्य के फैसलों में आपकी राय नहीं
अगर पार्टनर भविष्य से जुड़े बड़े फैसले आपकी राय जाने बिना लेने लगे और आपकी पसंद या जरूरतों को लगातार नजरअंदाज करे, तो यह भी एक संकेत हो सकता है। रिश्ते में साथ का मतलब सिर्फ वर्तमान समय साझा करना नहीं बल्कि आगे की जिंदगी को लेकर एक-दूसरे की सोच को महत्व देना भी है।
तुलना और माफी से बचना भी संकेत
अगर पार्टनर आपकी तारीफ करने के बजाय बार-बार आपकी तुलना दूसरों से करता है, तो यह आपके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह अपनी गलती स्वीकार न करना और हर बार आपको ही दोष देना भी रिश्ते के लिए अच्छा संकेत नहीं है। बदलाव की बात कहकर उसे लगातार टालना भी गंभीरता से लेना चाहिए।
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बात करने से शुरुआत करें, जल्दबाजी में फैसला नहीं
इनमें से एक-दो संकेत दिखने का मतलब यह नहीं कि रिश्ता खत्म हो गया है। काम का तनाव, व्यक्तिगत परेशानी या दूसरी परिस्थितियां भी व्यवहार बदल सकती हैं। इसलिए पहले शांत तरीके से पार्टनर से बात करें। साफ बताएं कि कौन-सी बात आपको परेशान कर रही है और आप कैसा महसूस कर रहे हैं। अगर वह आपकी बात समझकर बदलाव की कोशिश करता है, तो रिश्ता बेहतर हो सकता है। लेकिन लगातार बातचीत के बाद भी कोई सुधार न हो, तो अपनी सीमाओं और जरूरतों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर रिलेशनशिप काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।











