Commonwealth Games 2026:कॉमनवेल्थ गेम्स में शर्मिला धनकड़ ने जीता गोल्ड मेडल, ट्रेनिंग के लिए बेच दिया था घर

महिलाओं के F57 शॉट पुट इवेंट में शर्मिला धनकड़ ने भारत को दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया। इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश की झोली में एक और पदक डाला। अब भारत के कुल पदकों की संख्या 10 पहुंच गई है। शर्मिला की सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, आर्थिक तंगी और परिवार का साथ सबसे बड़ी ताकत बना।
शर्मिला ने सीजन बेस्ट थ्रो के साथ जीता गोल्ड
महिलाओं के पैरा शॉट पुट F57 वर्ग में शर्मिला धनकड़ ने 9.81 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। यह मौजूदा कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर भारत की शुरुआत शानदार बनाई थी।
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भारत की पदक तालिका लगातार हो रही मजबूत
शर्मिला की जीत के बाद भारत के खाते में कुल 10 पदक हो गए हैं और टीम पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गई है। अन्य मुकाबलों में हाई जंप में सर्वेश कुशारे और वेटलिफ्टिंग के 79 किलोग्राम वर्ग में अजय बाबू ने सिल्वर मेडल जीता। वहीं, बिंदियारानी देवी ने ब्रॉन्ज और ज्ञानेश्वरी यादव ने सिल्वर मेडल जीतकर भारत की झोली में और सफलता जोड़ी। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया 26 गोल्ड सहित 59 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।
पोलियो, गरीबी और संघर्ष के बीच नहीं टूटा हौसला
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली शर्मिला धनकड़ दो साल की उम्र में पोलियो की शिकार हो गई थीं, जिससे उनका एक पैर प्रभावित हो गया। पिता छोटे किसान थे और मां दृष्टिबाधित हैं, इसलिए बेहतर इलाज नहीं हो सका। आर्थिक तंगी के कारण कम उम्र में उनकी शादी हो गई और बाद में उन्हें कई पारिवारिक मुश्किलों का सामना भी करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोड़ने का फैसला नहीं किया।
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घर बेचा, फिर भी नहीं छोड़ी प्रैक्टिस
शर्मिला ने 34 वर्ष की उम्र में कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में पैरा एथलेटिक्स के F57 सीटेड शॉट पुट इवेंट की ट्रेनिंग शुरू की। वर्ष 2023 में ट्रेनिंग का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने अपना घर तक बेच दिया और परिवार किराए के मकान में रहने लगा, लेकिन प्रैक्टिस जारी रखी। इससे पहले पति से अलग होने के बाद वह अपनी दो बेटियों के साथ मायके लौट आई थीं। बाद में दूसरी शादी के बाद उनके पति अजीत ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पैरा एथलेटिक्स में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आज उसी संघर्ष का परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडल के रूप में पूरी दुनिया के सामने है।












