Parliament Monsoon Session:प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया, लोकसभा में बोले अखिलेश यादव

लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सरकार को पेपर लीक, आउटसोर्सिंग और युवाओं के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन ने सरकार को अपने फैसलों पर सोचने के लिए मजबूर किया। किसानों के आंदोलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सरकार पर दबाव में फैसले बदलने का आरोप लगाया। साथ ही शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।
युवाओं के आंदोलन को बताया बदलाव की वजह
लोकसभा में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वह लंबे समय से युवाओं के आंदोलन को देख रहे थे और शुरुआत में जिसे हल्के में लिया जा रहा था, वही आंदोलन बाद में इतना बड़ा बन गया कि सरकार को धरने की अनुमति देनी पड़ी। जब युवा संगठित होकर अपनी बात रखते हैं तो सरकार को भी अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ता है। इसी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा लोकतंत्र में जनता की आवाज को नजरअंदाज करना आसान नहीं होता और यही वजह है कि सरकार को कई बार अपने रुख में बदलाव करना पड़ा।
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पेपर लीक पर सरकार से मांगा जवाब
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में करीब 20 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में भी लगातार ऐसी घटनाएं सामने आईं, बार-बार होने वाली पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। उन्होंने सरकार से पूछा कि आखिर इन मामलों की जिम्मेदारी कौन लेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई कब होगी।
'एक प्रधान को हटाकर दूसरे प्रधान को बचाया'
अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान बिना किसी का नाम लिए सरकार पर राजनीतिक तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक प्रधान को हटाकर दूसरे प्रधान को बचा लिया। किसी मंत्री के वापस लौटने और उनके स्वागत से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को असली मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। इसी के साथ अखिलेश यादव ने कहा युवाओं की समस्याओं और परीक्षा प्रणाली की खामियों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
'चुनाव नजदीक आते ही सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लिए'
सपा अध्यक्ष ने किसानों के आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में सरकार ने प्रदर्शन करने की अनुमति तक नहीं दी थी, लेकिन जब राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और चुनाव करीब आए तो तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। इससे साफ है कि जब जनता एकजुट होकर अपनी बात मजबूती से रखती है तो सरकार को भी झुकना पड़ता है। उन्होंने युवाओं के आंदोलन को भी इसी तरह का जनआंदोलन बताते हुए कहा कि इसमें छात्रों के साथ उनके माता-पिता भी खुलकर शामिल हुए।
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आउटसोर्सिंग और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की आउटसोर्सिंग नीति को लेकर विपक्ष लगातार चिंता जता रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी महत्वपूर्ण संस्था की व्यवस्था तक आउटसोर्सिंग के दायरे में लाई जा रही है तो जवाबदेही किसकी होगी। मौजूदा नीतियों के कारण शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है। अगर समय रहते पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो युवाओं का भरोसा सरकारी भर्ती प्रक्रिया से उठ सकता है। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और युवाओं के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की।












