जिलों के बाद PHQ से हटेंगे ‘अंगद के पांव’ अब मुख्यालय की शाखाओं में वर्षों से जमे पुलिसकर्मियों की बनेगी सूची

भोपाल। जिलों के थानों में चार साल या उससे अधिक समय से जमे पुलिसकर्मियों को हटाने के बाद अब पुलिस मुख्यालय की उन शाखाओं में भी बदलाव की तैयारी है, जहां कर्मचारी और अधिकारी लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ हैं। पीएचक्यू की विभिन्न शाखाओं में वर्षों से एक ही सेक्शन और कुर्सी पर जमे स्टेनो से लेकर सहायक वर्ग-3 तक के कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है। इन्हें एक शाखा से दूसरी शाखा में स्थानांतरित किया जा सकता है।
एक जगह अधिकतम तीन साल का नियम
दरअसल, सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के मुताबिक सरकारी कर्मचारी को एक ही सेक्शन में अधिकतम तीन साल तक पदस्थ रखने की व्यवस्था है। इसके बाद उसके दायित्व या कार्यस्थल में बदलाव किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना और एक ही जगह लंबे समय तक रहने से बनने वाली व्यवस्था को रोकना है। इसके बावजूद पुलिस मुख्यालय की कई शाखाओं में कर्मचारी वर्षों से एक ही सेक्शन में काम कर रहे हैं।
इन शाखाओं में सबसे ज्यादा लंबे समय से जमे
पीएचक्यू की प्रशासन, लेखा, एसएएफ, सीआईडी और स्पेशल ब्रांच सहित अन्य शाखाओं में अपवाद को छोड़कर बड़ी संख्या में कर्मचारी लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ हैं। इनमें कुछ कर्मचारी 10 से 12 साल से एक ही शाखा में काम कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों को अब शाखा बदलकर दूसरी जिम्मेदारी देने की तैयारी है।
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जिलों से मांगा पालन प्रतिवेदन
पुलिस मुख्यालय ने जिलों के एसपी, रेंज डीआईजी और जोन आईजी से पुलिसकर्मियों के तबादले को लेकर रिपोर्ट मांगी है। इसमें चार साल या उससे अधिक समय से एक ही थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाने की जानकारी मांगी गई है। निर्देशों के मुताबिक यदि किसी थाने में चार साल से अधिक समय से पदस्थ पुलिसकर्मी को नहीं हटाया गया है तो संबंधित थाना प्रभारी या वरिष्ठ अधिकारी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाएगा।
बाबुओं को लेकर अलग व्यवस्था
जिलों में चार साल से अधिक समय से एक ही थाने में पदस्थ पुलिसकर्मियों को हटाया गया है। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय में भी बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रदेशभर में निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिलों से पालन प्रतिवेदन मांगा गया है। हालांकि, जिलों में पुलिसकर्मियों के तबादले संबंधी निर्देशों में पीएचक्यू के बाबुओं को शामिल नहीं किया गया है।
-आदर्श कटियार, स्पेशल डीजी, एडमिन, पीएचक्यू
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