सीहोर में चार रास्ते निर्माणाधीन, एक ही मार्ग पर हजारों वाहन… कैसे संभलेगा चिंतामन गणेश मेला?
सीहोर। सिद्धपीठ चिंतामन गणेश मंदिर में 14 सितंबर से शुरू होने जा रहे 12 दिवसीय गणेशोत्सव को लेकर तैयारियां अंतिम दौर में हैं। प्रदेशभर से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन के बीच इस बार प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यातायात व्यवस्था को लेकर है। बकरी पुल से लेकर नदी चौराहा, मनकामेश्वर और शुगर मिल क्षेत्र तक अलग-अलग स्थानों पर चल रहे निर्माण कार्यों के कारण पिछले वर्षों में इस्तेमाल होने वाला वन-वे और वैकल्पिक रूट सिस्टम प्रभावित हो गया है। ऐसे में बाहर से आने वाले करीब 8 से 10 हजार वाहनों का दबाव एक सीमित मार्ग पर पड़ने की आशंका है। पार्किंग की क्षमता भी लगभग 300 चार पहिया वाहनों तक सीमित बताई गई है। इससे मेले के प्रमुख दिनों में शहर में जाम की स्थिति गंभीर होने की आशंका है।
एक सड़क पर आना-जाना, सबसे बड़ी चुनौती
पिछले वर्षों में गणेश मेले के दौरान यातायात को अलग-अलग मार्गों पर बांटकर वाहनों की आवाजाही कराई जाती थी। श्रद्धालुओं के वाहन मंत्री पेट्रोल पंप की ओर से मंदिर की तरफ भेजे जाते थे, जबकि दर्शन के बाद वाहनों को शुगर मिल चौराहा, तहसील चौराहा, नदी चौराहा और एक्सीलेंस स्कूल होते हुए इंदौर नाका की तरफ निकाला जाता था। इससे आने और जाने वाले वाहनों का दबाव अलग-अलग हो जाता था। इस बार निर्माण कार्यों के कारण यह ट्रैफिक सर्किट प्रभावित है। नतीजतन मंत्री पेट्रोल पंप रोड ही सबसे महत्वपूर्ण मार्ग बन गया है।
चार प्रमुख रास्तों पर निर्माण ने बिगाड़ा प्लान
शहर के कई प्रमुख मार्ग फिलहाल निर्माण और सड़क कार्यों के कारण सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह उपयोगी नहीं हैं। बकरी पुल लंबे समय से निर्माणाधीन है। यह मार्ग तहसील चौराहा और इंदौर नाका क्षेत्र के बीच यातायात का महत्वपूर्ण हिस्सा संभालता था। इसके बंद होने से वापसी वाले वाहनों के लिए विकल्प कम हो गए हैं। इसी तरह नदी चौराहा से मनकामेश्वर मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग पर भी सड़क निर्माण का काम चल रहा है। पहले से ही संकरे इस क्षेत्र में सामान्य दिनों में भी यातायात दबाव रहता है।
शुगर मिल क्षेत्र से भी नहीं मिल पाएगा पूरा विकल्प
शुगर मिल से कोतवाली चौराहा और मछली पुल की ओर जाने वाले मार्ग की अपनी सीमाएं हैं। मछली पुल के आसपास सड़क संकरी होने के कारण बड़े पैमाने पर वाहनों की आवाजाही कराने में परेशानी हो सकती है। दूसरी ओर शुगर मिल से मंडी रोड की तरफ जाने वाले मार्ग पर रेलवे अंडरब्रिज भी यातायात के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में मेले के दौरान वैकल्पिक रूट का इस्तेमाल कितना प्रभावी रहेगा, यह बड़ा सवाल है।
300 वाहनों की पार्किंग, हजारों वाहन कहां खड़े होंगे?
यातायात के साथ पार्किंग व्यवस्था भी चिंता का प्रमुख कारण है। प्रशासन की ओर से दो स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई है। इनमें पहली पार्किंग पुलिया के पास टीले पर और दूसरी पुरानी नर्सरी तथा ईंट भट्ठों के आसपास बताई गई है। दोनों स्थानों की क्षमता करीब 300 चार पहिया वाहनों की बताई जा रही है। इसके मुकाबले मेले के प्रमुख दिनों में बाहर से हजारों वाहन आने की संभावना है। यदि पार्किंग स्थल जल्दी भर गए तो बड़ी संख्या में वाहन सड़कों के किनारे खड़े हो सकते हैं, जिससे जाम का दबाव और बढ़ सकता है।
बुधवार, शनिवार और रविवार को बढ़ेगा दबाव
मेले के दौरान अवकाश और भीड़ वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। ऐसे समय में एक ही मार्ग से बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने पर यातायात की गति प्रभावित हो सकती है। स्थानीय दुकानदारों और रहवासियों को भी आशंका है कि यदि वाहनों को व्यवस्थित ढंग से पार्क नहीं कराया गया तो मंदिर क्षेत्र के साथ आसपास के बाजार और संपर्क मार्ग भी जाम की चपेट में आ सकते हैं।
कलेक्टर-एसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
मेले की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कलेक्टर बालागुरु के. और एसपी सहित पुलिस अधिकारियों ने चिंतामन गणेश मंदिर परिसर का जायजा लिया। मंदिर प्रबंधन से जुड़े पंडित पृथ्वी बल्लभ दुबे और पुजारी पंडित हेमंत बल्लभ दुबे के अनुसार इस बार गणेशोत्सव 12 दिनों तक चलेगा। 14 सितंबर को सुबह विशेष अभिषेक के बाद दोपहर में जन्म आरती के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। मंदिर परिसर में झूले, दुकानें और अन्य व्यवस्थाएं भी आकार लेने लगी हैं।
24 घंटे सुरक्षा, 80 से 100 जवान संभालेंगे मोर्चा
मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने भी व्यापक तैयारी की है। सीएसपी डॉ. अभिनंदना शर्मा के अनुसार शहर में बड़ी गणेश प्रतिमाओं की स्थापना के लिए करीब 45 बड़े स्थान चिन्हित किए गए हैं। इनकी संख्या में आगे और वृद्धि हो सकती है। भाई शहर में 100 से 150 स्थान पर भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। चिंतामन गणेश मंदिर परिसर में लगने वाले मेले के लिए करीब 80 से 100 पुलिसकर्मियों का बल तैनात किया जाएगा। पुलिस व्यवस्था 24 घंटे तीन पालियों में संचालित होगी। सुबह और दिन के समय अधिक बल तैनात रहेगा, जबकि रात में भी विशेष निगरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
सीसीटीवी और वालंटियर नेटवर्क से होगी निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस के कैमरों के साथ आयोजकों को भी पंडालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। बाजार क्षेत्र में दुकानों पर लगे कैमरों का रुख पंडालों और भीड़ वाले क्षेत्रों की ओर करने का सुझाव दिया गया है। आयोजकों से सक्रिय वालंटियर्स की सूची भी मांगी गई है। ये स्वयंसेवक दिन और रात दोनों समय पुलिस के साथ समन्वय कर भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था संभालने में सहयोग करेंगे।
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तीन शिफ्ट में ट्रैफिक बल, रात में अलग निगरानी
ट्रैफिक इंचार्ज बृजमोहन धाकड़ के अनुसार मेले के दौरान यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए विशेष पुलिस बल तैनात किया गया है। पहली शिफ्ट सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक रहेगी। इसके बाद मंदिर परिसर के आंतरिक हिस्से में अलग से निगरानी व्यवस्था जारी रहेगी। बंद पुल, निर्माणाधीन सड़क और सीमित वैकल्पिक मार्गों को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस के लिए यह मेला बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
आस्था के साथ यातायात व्यवस्था की परीक्षा
चिंतामन गणेश मंदिर का 12 दिवसीय उत्सव सीहोर ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर के श्रद्धालुओं के लिए बड़ा धार्मिक आयोजन है। लाखों श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ के बीच प्रशासन के सामने इस बार सबसे बड़ी परीक्षा यातायात और पार्किंग व्यवस्था की है। चार प्रमुख वैकल्पिक मार्गों पर निर्माण कार्य, सीमित पार्किंग और एक प्रमुख सड़क पर बढ़ता दबाव चुनौती को और गंभीर बना रहा है। अब निगाह इस बात पर है कि प्रशासन अंतिम समय में ट्रैफिक डायवर्जन, अतिरिक्त पार्किंग और भीड़ प्रबंधन के लिए क्या वैकल्पिक इंतजाम करता है।






















