सीहोर में मन की बात कार्यक्रम में मंच पर दो मंत्री, पीछे खाली कुर्सियां

सीहोर। कार्यक्रम स्थल पर जहां मंच और उसके आसपास नेताओं की मौजूदगी दिखाई दे रही थी, वहीं कुछ दूरी पर नजर डालते ही आयोजन की तस्वीर का दूसरा पहलू सामने आया। आम जनता और कार्यकर्ताओं के लिए लगाई गई लाल रंग की कुर्सियों की लंबी कतारें बड़ी संख्या में खाली नजर आईं। खास बात यह रही कि खाली कुर्सियां सीधे मंत्रियों के पीछे दिखाई दे रही थीं।
सैकड़ों कुर्सियां श्रोताओं का इंतजार करती रहीं
आयोजकों ने कार्यक्रम में आम लोगों और कार्यकर्ताओं के बैठने के लिए बाकायदा बैठक व्यवस्था की थी। पंडाल में कतार से कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन कार्यक्रम के दौरान इनमें बड़ी संख्या में लोग नजर नहीं आए। इससे आयोजन में अपेक्षित जनभागीदारी को लेकर सवाल उठने लगे। हालांकि आयोजकों की ओर से कार्यक्रम के लिए निर्धारित भीड़ या उपस्थिति का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
ये भी पढ़ें: सीहोर में 500 किसानों का जल सत्याग्रह, पार्वती-कुलासी नदी में उतरकर बजाई थाली; बिजली अफसरों पर FIR की मांग
दो कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी भी नहीं भर सकी कुर्सियां
करण सिंह वर्मा और प्रहलाद पटेल जैसे दो कैबिनेट मंत्रियों की मौजूदगी के बावजूद पीछे की बैठक व्यवस्था में खाली कुर्सियों का दृश्य खासा ध्यान खींचने वाला रहा। मंच पर जहां मंत्री प्रधानमंत्री का संबोधन सुनते और तालियों से स्वागत करते दिखाई दिए, वहीं कैमरे का रुख पीछे हुआ तो खाली कुर्सियों की कतारें आयोजन की दूसरी तस्वीर दिखाती नजर आईं।
तस्वीरों ने बढ़ाई आयोजन को लेकर चर्चा
कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आने के बाद बोरदी का यह आयोजन चर्चा में है। एक तरफ मंच पर मंत्री और प्रमुख नेता दिखाई दे रहे हैं, दूसरी तरफ उनके पीछे बड़ी संख्या में खाली कुर्सियां नजर आ रही हैं। यही अंतर अब कार्यक्रम में वास्तविक जनभागीदारी को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
भीड़ के दावे और मौके की तस्वीर के बीच सवाल
किसी भी सार्वजनिक आयोजन में मंच की भव्यता के साथ आम लोगों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बोरदी में भी कार्यक्रम के दौरान मंच और वीआईपी क्षेत्र की मौजूदगी के मुकाबले पीछे की खाली बैठक व्यवस्था ने आयोजन की तैयारियों और जनभागीदारी को लेकर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि खाली कुर्सियों की तस्वीर पूरे आयोजन में मौजूद लोगों की कुल संख्या का अंतिम प्रमाण नहीं मानी जा सकती, लेकिन कार्यक्रम के दौरान दिखाई दिया यह दृश्य निश्चित रूप से चर्चा का कारण बना।
मन की बात से ज्यादा खाली कुर्सियों ने खींचा ध्यान
प्रधानमंत्री का संबोधन सुनने पहुंचे मंत्रियों और नेताओं के बीच कार्यक्रम निर्धारित तरीके से चलता रहा, लेकिन आयोजन स्थल की खाली कुर्सियों ने अलग ही कहानी बयां की। मंच पर जहां मन की बात सुनी जा रही थी, वहीं पीछे खाली कुर्सियों की कतारें कार्यक्रम की जनभागीदारी को लेकर सवाल छोड़ गईं।


















