एस जयशंकर, प्रवीण सूद और जनरल उपेंद्र द्विवेदी को SIR नोटिस, चुनाव आयोग ने साफ किया- नाम अपने आप नहीं हटेगा

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको एस जयशंकर समेत कई वरिष्ठ मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद, उनकी पत्नी वनीता सूद और मां कमलेश सूद के अलावा पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी भी शामिल हैं। नोटिस जारी होने के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ नोटिस जारी होने का मतलब किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाना नहीं है। संबंधित मतदाताओं को अपनी जानकारी स्पष्ट करने और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने का अवसर दिया जाएगा।
इन लोगों को भेजा गया नोटिस
SIR के तहत जारी नोटिस पाने वालों में एस जयशंकर और उनकी पत्नी क्योको एस जयशंकर के अलावा CBI डायरेक्टर प्रवीण सूद और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं। पूर्व सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी को भी नोटिस जारी किया गया है। ये सभी मतदाता दिल्ली की नई दिल्ली विधानसभा सीट में पंजीकृत बताए गए हैं। इसके अलावा कुछ अन्य प्रमुख मतदाताओं को भी SIR प्रक्रिया के तहत नोटिस दिए गए हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण के रिकॉर्ड से मिलाना और जिन मामलों में रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाया है, उनकी जानकारी स्पष्ट करना है।
एस जयशंकर का रिकॉर्ड किस श्रेणी में है
रिपोर्ट के मुताबिक एस जयशंकर और उनकी पत्नी को अनमैप्ड लास्ट SIR श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची के रिकॉर्ड से जोड़ा नहीं जा सका। एस जयशंकर और उनकी पत्नी नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के सुंदर बाग इलाके में मतदाता के रूप में पंजीकृत हैं। प्रवीण सूद और उनके परिवार के सदस्यों के साथ जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनकी पत्नी को भी इसी श्रेणी में नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
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नोटिस क्यों भेजे जा रहे हैं?
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को पिछले पुनरीक्षण के रिकॉर्ड से मिलाने का काम किया जा रहा है। आयोग के निर्देशों के मुताबिक जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड पिछली SIR की मतदाता सूची से लिंक नहीं हो पाता, उन्हें ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद नोटिस जारी कर पात्रता और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करने का अवसर दिया जाता है। दिल्ली में SIR के तहत मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जा चुका है और संबंधित मतदाताओं को अपने रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी स्पष्ट करने की प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने नाम हटाने को लेकर क्या कहा?
नोटिस को लेकर बढ़ी चिंता के बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलना नाम हटाने का अंतिम फैसला नहीं है। संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मतदाता सूची से नाम नहीं हटाया जा सकता। आयोग के मुताबिक SIR प्रक्रिया के दौरान ऐसे मतदाताओं को सिस्टम के जरिए नोटिस भेजे जा रहे हैं जिनके रिकॉर्ड को पिछली मतदाता सूची से जोड़ने में दिक्कत आई है। इसका उद्देश्य रिकॉर्ड को सत्यापित और सही करना है।
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मतदाताओं को अपनी जानकारी ठीक करने का मौका
चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत मतदाता अपने रिकॉर्ड की जांच कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसमें सुधार या आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। आयोग की मतदाता सेवा व्यवस्था में मतदाता सूची में नाम खोजने और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी देखने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसलिए एस जयशंकर, प्रवीण सूद, जनरल उपेंद्र द्विवेदी और अन्य लोगों को मिले SIR नोटिस को फिलहाल रिकॉर्ड सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि नोटिस जारी होने मात्र से किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं हो जाता।




















